पश्चिम बंगाल में पैसों के लिए गुर्दे बेच रहे हैं लोग

Image caption शरीर के किसी भी अंग की खरीद-फरोख्त गैर कानूनी है

गुर्दा या शरीर के किसी भी अंग की खरीद और बिक्री भारत में गैरकानूनी है. बावजूद इसके सभी जानते हैं कि ये देश के हर हिस्से में काफी तेजी से फैल रहा है.

लेकिन बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि ये धंधा कैसे फल-फूल रहा है.

अब्दुल रज्जाक पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले के छोटे से गाँव बिंडोल के रहने वाले हैं. उन्होंने बीबीसी को विस्तार से बताया कि ये पूरा रैकेट कैसे काम करता है.

रज्जाक इस पूरे गिरोह को काफी भीतर से जानते हैं क्योंकि वे खुद देश के इस बड़े ‘व्यापार’ के हिस्सा रह चुके हैं.

गैरकानूनी किडनी रैकेट के एक अन्य बड़े व्यापारी कुद्दुस को कुछ हफ्तों पहले गिरफ्तार किया गया था और इस समय वे न्यायिक हिरासत में हैं.

धंधे का सूत्रधार

Image caption दिनाजपुर में अब्दुल रज़्ज़ाक इस धंधे के सूत्रधार हैं.

रज्जाक बताते हैं, "कुछ साल पहले मैंने खुद अपना गुर्दा बेचा था. तभी से गाँव में ये खबर फैल गई कि लोग अपने गुर्दे भी बेच सकते हैं. और फिर लोगों ने मुझसे अपने गुर्दे बेचने का आग्रह करना शुरू कर दिया."

और फिर इसी तरह ये धंधा शुरू हो गया. अब्दुल रज्जाक कहते हैं कि उन्होंने कभी किसी पर गुर्दे बेचने के लिए दबाव नहीं डाला.

लेकिन बिंडोल गाँव के कुछ लोगों का कहना है कि रज्जाक ने गरीब ग्रामीणों को ढेर सारे पैसे का लालच दिया और ऐसा करने के लिए उन्हें प्रेरित किया.

जो लोग उनकी बातों में नहीं आए, रज्जाक ने बिना लोगों को बताए उनके गुर्दे बेचने शुरू कर दिए.

रज्जाक कहते हैं, "मैं गुर्दा देने वालों को मुंबई ऑपरेशन के लिए ले जाता था. बाद में वहाँ सख्त कानून बन जाने के बाद मैंने ये ऑपरेशन कोलकाता में कराना शुरू कर दिया."

रज्जाक के मुताबिक गुर्दा देने वाले व्यक्ति से ऑपरेशन और कीमत के बारे में पूरी बातचीत फाइनल हो जाने के बाद ही अस्पताल और डॉक्टर के बारे में उसे बताया जाता था.

मशहूर अस्पताल भी शामिल

गाँव वाले और खुद रज्जाक ऐसे तमाम मशहूर अस्पतालों का नाम बताते हैं जहां गैरकानूनी तरीके से गुर्दे का प्रत्यारोपण होता है.

इन अस्पतालों में मध्य कलकत्ता का एक मशहूर नर्सिंग होम भी शामिल है. गुर्दा दान करने वालों के ज्यादातर ऑपरेशन यहीं किए गए.

जब मैंने नर्सिंग होम के मालिक डॉ. एमसी सील से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया, "हमारे पास हर एक ऑपरेशन के कागजात हैं. हमारे पास शपथ पत्र, स्वास्थ्य विभाग का क्लियरेंस, गुर्दा देने वाले का पहचान पत्र सब कुछ है. हम कुछ भी गैरकानूनी नहीं करते."

डॉ. सील के पास सारे कागजात हो सकते हैं, लेकिन इनके साथ आसानी से फर्जीवाड़ा किया जा सकता है.

रज्जाक ने बताया, "ये सारे कागजात पाने के लिए आपको आठ से दस हजार रुपये खर्च करने की जरूरत है."

विभाग की सफाई

लेकिन सवाल उठता है कि क्या ये राज्य के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है कि वो इन कागजात की जांच करे.

इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता डॉ. असित बिस्वास कहते हैं, "कायदे से तो होना चाहिए लेकिन व्यावहारिक तौर पर ये संभव नहीं है. खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर की मौजूदगी के लिहाज से. हमारे से रोज हजारों दस्तावेज आते हैं, लेकिन जब तक किसी के फर्जी होने की शिकायत नहीं होती तब तक हम कुछ नहीं कर सकते."

बिंडोल में किडनी रैकेट के खिलाफ काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन का कहना है कि प्रशासन के संज्ञान में लाने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती.

इसी गैर सरकारी संगठन ने बिंडोल गाँव में उन लोगों का सर्वेक्षण कराया था जिन्होंने अपने गुर्दे बेचे थे.

इस सर्वेक्षण में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई कि कैसे एक छोटा सा गाँव गैरकानूनी गुर्दा व्यापार का एक बड़ा केंद्र बन गया.

पैसों की खातिर

Image caption इस महिला के पुत्र का गुर्दे निकाल लिया गया. उसे पैसे भी नहीं मिले. अब इसका बेटा लापता है.

इस गैर सरकारी संगठन की अध्यक्ष जोबा भट्टाचार्य कहती हैं, "यह अत्यंत पिछडा़ हुआ इलाका है. गाँव वालों को साल भर में सिर्फ 4-5 महीने ही काम मिलता है. ऐसे में लोग ज्यादा पैसों के लालच में दूसरी जगहों पर चले जाते हैं. लेकिन अब स्थिति दूसरी है. हम कई ऐसे गाँव वालों को भी जानते हैं जिन्होंने अपनी मर्जी से गुर्दे बेचे हैं."

ऐसी ही बातें गाँव के भी कुछ लोग कहते हैं कि उन्हें अपनी आजीविका के लिए ऐसा करना पड़ा है.

लेकिन गाँव वालों का आरोप है कि उन्हें कभी भी उतना पैसा नहीं मिला जितना उनसे वादा किया गया था.

जबकि कुछ गाँव वालों ने मुझसे बातचीत में ये भी कहा कि उन्हें ये पता भी नहीं कि उनका गुर्दा निकाल लिया गया है. और इस रैकेट में अब एक नया ट्रेंड जुड़ गया है, और वो है- महिलाओं का गुर्दा निकालना.

मैंने एक ऐसी महिला से बात की जिसके पति ने अपना गुर्दा तीन साल पहले बेच दिया था. इस महिला ने भी फरवरी में अपना गुर्दा बेच दिया.

आस-पास के क्षेत्रों में ऐसी बहुत सी और महिलाएं अपने गुर्दे बेचने के लिए तैयार बैठी हैं.

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