भारत का 'अग्नि' परीक्षण सफल

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

भारतीय अधिकारियों ने गुरुवार को कहा है कि उसने अपनी सबसे शक्तिशाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है जो 'पूरी तरह से सफल' रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि 5000 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली ये मिसाइल परमाणु क्षमता से लैस है.

इसका अर्थ ये है कि इस मिसाइल के साथ भारत के पास पहली बार बीजिंग और शंघाई तक मार करने की क्षमता हो गई है.

ग्राफ़िक्स में देखिए कहाँ कहाँ मार कर सकती है नई मिसाइल

विशेषज्ञों का कहना है कि इस मिसाइल से भारत को चीन के खिलाफ एक मजबूत रक्षा कवच मिल सकेगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री एके एंटनी ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों को अग्नि-5 के सफल परीक्षण के लिए बधाई दी है.

चीन ने इस पर संतुलित प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है, "चीन और भारत दोनों उभरते हुए देश हैं, हम प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी हैं."

सफल परीक्षण

गुरुवार की सुबह 8.07 बजे इसका प्रक्षेपण किया गया.

क्या है अग्नि-5 की विशेषता

चांदीपुर के अस्थाई टेस्ट रेंज (ITR) के निदेशक एसपी दाश ने फ़ोन पर बीबीसी से कहा, "आज का परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा और सभी तकनीकी मापदंडों पर खरा उतरा. मिसाइल ने ठीक समय पर अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्य को भेद लिया."

एक टेलीविज़न चैनल से बात करते हुए डीआरडीओ के प्रमुख विजय सारस्वत ने कहा, "मिसाइल 600 किलोमीटर की ऊँचाई तक गया, इसके रॉकेट के तीनों चरणों ने ठीक ढंग से काम किया."

मिसाइल को हिंद महासागर में दागा गया और उसका लक्ष्य इंडोनेशिया के पास किसी स्थान के लिए निर्धारित था.

पहले इसका परीक्षण बुधवार की शाम को होना था लेकिन खराब मौसम की वजह से इसे गुरुवार की सुबह तक के लिए टाल दिया गया था.

डीआरडीओ के प्रमुख विजय सारस्वत ने एक टेलीविज़न चैनल से हुई बातचीत में कहा है कि भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं के आधार पर काम कर रहा है और वह लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास की दिशा में काम करता रहेगा.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

उन्होंने कहा कि इसी वर्ष अग्नि-5 के दो और परीक्षण किए जाएँगे.

वैसे तो अग्नि-5 को सेना में शामिल किए जाने का रास्ता खुल गया है लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सेना में औपचारिक रुप से शामिल किए जाने से पहले इसके चार-पाँच परीक्षण और करने होंगे.

उनका मानना है कि वर्ष 2014-15 तक ही ये मिसाइल सेना का हिस्सा बन सकेगी.

'एलीट क्लब' में नहीं

इससे पहले अमरीका, चीन, रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन के पास इतनी शक्तिशाली मिसाइलें हैं. माना जाता है कि इसराइल के पास भी ऐसी मिसाइलें हो सकती हैं.

भारत के पास उपलब्ध मिसाइलें

भारतीय मीडिया में कहा जा रहा है कि अग्नि-5 के परीक्षण के बाद भारत परमाणु क्षमता से लैस अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल रखने वाले पाँच देशों के 'एलीट क्लब' में शामिल हो जाएगा.

लेकिन बीबीसी के रक्षा मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस के अनुसार भारत को 'एलीट क्लब' की सदस्यता तब तक नहीं मिल सकती जब तक भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं कर देता.

भारत एनपीटी पर हस्ताक्षर करने का पक्षधर नहीं है क्योंकि वह इस संधि को निष्पक्ष नहीं मानता.

नई तकनीक

अग्नि-5 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने तैयार किया है और इसे तैयार करने में 2500 करोड़ रुपए की लागत आई है.

इस मिसाइल की कुल लंबाई 17.5 मीटर है और ये करीब 49 टन वजनी है.

ये अपने साथ 1.5 टन तक के हथियार ले जाने में सक्षम है.

डीआरडीओ के अधिकारियों के अनुसार अग्नि-5 तीन रॉकेटों के सहारे काम करता है जिसमें ठोस ईंधन का प्रयोग होता है.

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2010 में अग्नि 3 के सफल प्रक्षेपण और उसके बाद 2011 में अग्नि 4 के सफल प्रक्षेपण के बाद उसी डिजाइन को अग्नि 5 के लिए विकसित किया गया है.

भारत की इंडरमीडियेट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों में अग्नि 1, अग्नि 2 और अग्नि 3 शामिल है जिनकी मारक क्षमता 700-800 किलोमीटर, 2000-2300 किलोमीटर और 3500 किलोमीटर से ज्यादा है.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

संबंधित समाचार