विधायक की रिहाई: प्रजा कोर्ट की अगली सुनवाई अब 25 अप्रैल को

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Image caption झीना हिकाका सत्ताधारी बीजू जनता दल के विधायक हैं

ओडिशा में अपहृत विधायक झीना हिकाका की रिहाई के लिए गुरुवार को आधी रात तक चले माओवादियों के प्रजा कोर्ट में इस बारे में कोई फैसला नहीं हो सका.

अब माओवादियों ने एक नया ऑडियो टेप भेजकर कहा है कि फ़ैसला लेने के लिए 25 अप्रैल को फिर से प्रजा कोर्ट में इस मसले पर चर्चा होगी.

माओवादियों और सरकार की ओर से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे दंडपाणि मोहंती ने इस सूचना की पुष्टि की है कि झीना हिकाका की रिहाई के लिए प्रजा कोर्ट में और बात होगी.

इस बीच झीना हिकाका की पत्नी कौशल्या ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि उन्हें अपने पति के बारे में अब तक कोई सूचना नहीं मिली है.

दो दिनों का बंद

इस बीच माओवादियों ने अपनी मांगों को लेकर नारायणपटना इलाक़े में दो दिनों का बंद रखा है.

माओवादियों ने ओडिशा के लखमीपुर के विधायक झीना हिकाका का गत 24 मार्च को अपहरण कर लिया गया था.

इसके बाद उनकी रिहाई के बदले माओवादियों ने कई मांगें रखीं हैं जिनमें ऑपरेशन ग्रीन हंट बंद करने से लेकर चासी मूलिया आदिवासी संघ के कार्यकर्ताओं की रिहाई शामिल है.

ख़बरें हैं कि सरकार ने इनमें से कई मांगें मानने के संकेत दिए हैं लेकिन इससे संतुष्ट नहीं है.

इससे पहले माओवादियों ने दो इतालवी नागरिकों का भी अपहरण किया था और उनकी रिहाई के बदले भी कई मांगें रखीं थीं.

इन दोनों इतालवी नागरिकों को एक-एक करके रिहा कर दिया गया है. समझा जाता है कि सरकार ने माओवादियों की मांग काफी हद तक मान ली थीं.

मांगों पर अड़े माओवादी

गुरुवार को कोरापुट जिले के नारायणपटना इलाके के घने जंगलों में माओवादियों के 'प्रजा कोर्ट' का आयोजन किया गया.

सूत्रों के अनुसार विधायक झीना हिकका को 'प्रजा कोर्ट' के सामने पेश किया गया. कोर्ट में उनके बारे में फैसला क्यों नहीं हो पाया, यह अभी स्पष्ट नहीं है.

लेकिन माओवादियों और चासी मुलिया आदिवासी संघ के वकील निहार रंजन पटनायक ने कोरापुट से फोन पर बीबीसी को बताया कि माओवादी मुख्य रूप से दो बातों को लेकर अड़ गए हैं.

पहला चासी मुलिया आदिवासी संघ के 72 वर्षीय सलाहकार गणनाथ पात्र की रिहाई और दूसरा सरकार की घोषणा के अनुसार 13 कैदियों की रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया की पहल.

वैसे बुधवार को माओवादियों की घोषणा के बाद सरकार ने उनकी एक प्रमुख मांग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा था कि जिन 25 कैदियों की रिहाई क़ी घोषणा पहले ही की जा चुकी है, उनमें से 13 के खिलाफ मुकदमे वापस लिए जाएँगे.

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