निर्णय न लेने की प्रवृति छोडें अफसर: प्रधानमंत्री

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Image caption मनमोहन सिंह सिविल सर्विस डे के मौके पर नौकरशाहों को संबोधित कर रहे थे.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा है कि अधिकारियों को साहस के साथ निर्णय लेने और फैसले न लेने की प्रवृति को छोड़ने की जरुरत है.

सिविल सर्विस दिवस के मौके पर नौकरशाहों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ईमानदार अफसरों को सरकार सुरक्षा देगी.

प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम सबका यह प्रयास होना चाहिए कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर संदिग्‍ध लोगों के नाम उजागर न ‌किए जाएं.''

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ईमानदार अधिकारियों को सुरक्षा देने को लेकर गंभीर है.

उन्होंने कहा कि सरकार की यह प्रतिबद्घता है कि वह एक ऐसा सिस्टम और माहौल बनाए कि हमारे नौकरशाह को निर्णायक भूमिका का निर्वाह करने के लिए प्रोत्साहित ‌किया जाए. साथ ही निर्णय लेने के दौरान हुई गलतियों के लिए उनको प्रताड़ित न किया जाए.

'नैतिकता कम'

उन्होंने कहा कि नौकरशाहों को इस प्रवृति को छोड़नी होगा कि निर्णय लेने से चीजों के गलत होने का डर है और इसके लिए उनको सजा भी दी जा सकती है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ''फैसले न लेने वाला अधिकारी सुरक्षित तो है लेकिन उसका समाज और देश में कोई योगदान नहीं होगा.''

उन्होंने कहा कि यह आम लोगों की धारणा है कि कुछ दशक पहले के नौकरशाहों में जितनी नैतिकता थी उतनी अब नहीं है. वे पहले के तुलना अब बाहरी दबाव में जल्द टूट जाते हैं. उन्होंने कहा कि इसमें कही न ‌कहीं सच्चाई है.

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