पहचाने गए कलेक्टर को अगवा करने वाले

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Image caption एलेक्स पॉल मेनॉन की बीवी आशा पॉल ने अपील की है कि उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए छोड़ दें.

पुलिस का कहना है कि सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनॉन का अपहरण करने वाले माओवादियों के गुट की पहचान कर ली गई है.

छत्तीसगढ़ में बीबीसी संवाददाता सलमान रावी के अनुसार पुलिस ने कहा है कि प्रत्यक्षदर्शियों से पता चला है कि घटना के स्थान मांझीपाड़ा पर कमांडर रमन्ना और भीमा वारदात के समय मौजूद थे.

मांझीपाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 47 किलोमीटर दूर है.

हालांकि पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी अपहरण के इस मामले पर कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं. अभी तक माओवादियों ने उन्हें छोड़ने के बदले कोई मांग नहीं रखी है.

इस बीच आज सुकमा और कौंटा में स्थानीय लोगों ने बंद का आह्वान किया है और सड़कों पर लोग प्रदर्शन भी कर रहे हैं. वे कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनॉन को छोड़ने की मांग कर रहे हैं.

उनकी बीवी आशा पॉल ने भी अपील की है कि उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए छोड़ दिया जाए.

उन्होंने कहा कि एलेक्स पॉल मेनॉन दमे के मरीज हैं. हर तीन घंटों बाद उन्हें दवाई की जरूरत होती है जो उनके पास नहीं है.

सबसे संवेदनशील

माओवादी हिंसा की दृष्टि से भारत के सबसे संवेदनशील माने जाने वाले सुकमा जिले में माओवादियों ने कलेक्टर का शनिवार शाम को अपहरण किया था जबकि उनके दो अंगरक्षक गोलीबारी में मारे गए थे.

मेनॉन वर्ष 2006 के बैच के आईएएस अधिकारी हैं और तमिलनाडू के रहने वाले हैं.

सुकमा जिला छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग में उडिशा-आंध्र प्रदेश की सीमा से सटा हुआ दुर्गम जंगलों वाला इलाका है. ये रायपुर से लगभग 450 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है.

इस घटना के बाद राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों में खासी दहशत है.

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