नक्सलियों ने रखी शर्तें, रमन सिंह ने बनाई समिति

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छत्तीसगढ़ में माओवादियों द्वारा अपहृत सुकमा जिले के कलेक्टर को रिहा कराने के लिए मुख्यमंत्री रमन सिंह की अध्यक्षता में पाँच सदस्यों की समिति बनाई गई है.

इस समिति में तीन सदस्य आदिवासी जनजातियों से हैं. समिति के गठन का फैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में देर शाम हुई बैठक के बाद लिया गया है. साथ ही ये भी तय हुआ है कि कलेक्टर के अपहरण और उन्हें रिहा कराने के मुद्दे पर जल्द ही एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी.

इससे पहले माओवादियों ने दक्षिणी छत्तीगढ़ के सुकमा जिले में दूरदराज मांझीवाड़ा इलाके के दौरे पर गए कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनॉन का अपहरण कर लिया था और उनके दो अंगरक्षकों को जान से मार दिया था.

इसके बाद बीबीसी को भेजे गए एक ऑडियो संदेश के जरिए माओवादियों ने सरकार को बातचीत के लिए 25 अप्रैल तक का समय दिया था और अपने कई साथियों की रिहाई और माओवादी विरोधी ऑपरेशन ग्रीनहंट को बंद करने की मांग रखी थी.

सुनिए माओवादी का बयान

बीबीसी को मिले रिकॉर्डिड बयान में कहा गया," हमने क्लेक्टर को गिरफ्तार किया है. हमारी शर्तें हैं कि ऑपरेशन ग्रीनहंट को बंद किया जाए, रायपुर जेल में फर्जी मामलों में बंद लोगों को रिहा किया जाए, सुरक्षाकर्मियों को वापस बैरक भेजा जाए, कोंटा ब्लॉक में कांग्रेस नेता पर हमले के मामले में लोगों के खिलाफ चलाए जा रहे मामले खत्म किए जाएँ. हमारे आठ साथियों को छोड़ा जाए- मरकाम गोपन्ना उर्फ सत्यम रेड्डी, निर्मल अक्का उर्फ विजय लक्ष्मी, देवपाल चंद्रशेखर रेड्डी, शांतिप्रिय रेड्डी, मीनाचौधरी, कोरसा सन्नी, मरकाम सन्नी, असित कुमार सेन."

इस बीच पुलिस का कहना है कि कलेक्टर का अपहरण करने वाले माओवादियों के गुट की पहचान कर ली गई है. पुलिस ने कहा है कि प्रत्यक्षदर्शियों से पता चला है कि मांझीपाड़ा में घटनास्थल पर माओवादी कमांडर रमन्ना और भीमा मौजूद थे.

सुकमा और कौंटा में स्थानीय लोगों ने कलेक्टर के अपहरण के खिलाफ रविवार को बंद का आह्वान किया था और सड़कों पर प्रदर्शन भी किया. वे कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनॉन को छोड़ने की मांग कर रहे थे. एलेक्स की पत्नी आशा पॉल ने भी अपील की है कि उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए छोड़ दिया जाए.

मेनन वर्ष 2006 के बैच के आईएएस अधिकारी हैं और तमिलनाडू के रहने वाले हैं.

सुकमा जिला छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग में उडिशा-आंध्र प्रदेश की सीमा से सटा हुआ दुर्गम जंगलों वाला इलाका है. ये रायपुर से लगभग 450 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है.

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