प्रोफेसर हरगोपाल होंगे नक्सलियों के दूसरे वार्ताकार

कलेक्टर मेनॉन इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption कलेक्टर मेनॉन रविवार को मांझीपाड़ा के दौरे पर थे जब उनका अपहरण कर लिया गया

जहाँ छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य मिश्रा और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच को अपहृत सुकमा कलेक्टर आईएएस की रिहाई के लिए मध्यस्थ बनाया है, वहीं माओवादियों की ओर से बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल बातचीत करेंगे.

इससे पहले माओवादियों ने पूर्व आईएएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता बीडी शर्मा, वकील प्रशांत भूषण और बस्तर में सीपीआई के नेता मनीष कुंजाम का वार्ताकारों के तौर पर नाम रखा था.

लेकिन इनमें से दो यानी वकील प्रशांत भूषण और मनीष कुंजाम ने मध्यस्थता करने से इन्कार कर दिया था. ेलकिन कुंजाम को अब कलेक्टर एलेक्स की दवा देकर अज्ञात स्थान पर भेजा गया है क्योंकि माओवादियों ने एलेक्स की हालत नाजुक बताई है.

शनिवार को सुकमा के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनॉन को मांझीपाड़ा से अगवा कर लिया गया था और उनके दो अंगरक्षकों की हत्या कर दी गई थी.

इंकार का कारण

मंगलवार सुबह इस मामले में टीम अन्ना के सदस्य और वकील प्रशांत भूषण ने मध्यस्थता से इन्कार कर दिया.

इससे पूर्व आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम ने भी इस मामले में मध्यस्थता से इन्कार किया था.

मंगलवार को प्रशांत भूषण ने मध्यस्थता से इंकार करते हुए कहा कि वे माओवादियों की कई मांगों से सहमत हैं लेकिन इस तरह की मध्यस्थता को ठीक नहीं समझते. साथ ही उन्होंने माओवादियों से बिना किसी शर्त कलेक्टर को रिहा करने की अपील की.

उनके इंकार करने के कुछ ही देर बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मिश्रा और बुच के नामों की घोषणा की.

मुझे एतराज नहीं: बीडी शर्मा

इससे पहले बीडी शर्मा ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि उन्हें इस मामले में वार्ताकार बनने में कोई एतराज नहीं है.

बीडी शर्मा ने हैदराबाद से बीबीसी से फोन पर बात करते हुए कहा, "हालांकि माओवादियों की ओर से मध्यस्थ बनाए जाने की मुझे कोई सूचना नहीं दी गई है लेकिन कलेक्टर की रिहाई के लिए दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने में मुझे कोई एतराज नहीं है. राज्य सरकार को माओवादियों की तरफ से दिए गए नामों पर सहमत होना होगा और मुझे नहीं पता कि छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार इसके लिए तैयार है या नहीं."

शर्मा लंबे समय से बस्तर में काम करते रहे हैं और उस इलाके को भली-भांति जानते हैं. उनका मानना है कि कलेक्टर के मामले को सुलझाने की जरूरत है.

बीबीसी को दिए गए एक बयान में माओवादियों ने 25 अप्रैल तक की समयसीमा रखी थी और ऑपरेशन ग्रीनहंट को बंद करने और उनके आठ सहयोगियों को रिहा करने की मांग सरकार के समक्ष रखी थी.

संबंधित समाचार