मेरा दर्द न जाने कोई: अमिताभ बच्चन

Image caption बोफोर्स प्रकरण के बाद अमिताभ ने संसद से इस्तीफा दिया था और राजनीति से सन्यास ले लिया था

स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम के इस पर्दाफाश के बाद कि बोफोर्स रिश्वत मामले में अधिकारियों ने फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन का नाम जबरदस्ती जोड़ा था, अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा कि आज उनका विश्वास फिर से बहाल हो गया है.

उन्होंने लिखा,"घटना के 25 साल बाद मैं अपना व्यक्तिगत अनुभव बताता हूँ, मैंने आज ही पढ़ा कि मामले की जांच करने वाले प्रमुख जाँचकर्ता ने मुझे बेकसूर करार दिया है.वो गलती जो मैने की ही नही थी, लेकिन वो जो शायद हमेशा मेरी जिन्दगी पर बदनुमा दाग था और शायद आगे भी रहेगा."

बोफोर्स मामले से आहत अमिताभ आगे लिखते है, "इस इल्जाम की वजह से मैने जितने घंटे, दिन महीने और साल तकलीफ में गुजारे, उसका कोई भी आदमी अंदाज नही लगा सकता. लेकिन क्या इससे दूसरों को कोई फर्क पड़ता है, शायद नही."

अंतरआत्मा की आवाज

अमिताभ बच्चन ने कहा, "जिन्होंने इसमें अहम भूमिका निभाई उनकी अंतरआत्मा पर आज भी कोई कोई फर्क नही पड़ता. अगर उनकी कोई अंतरआत्मा की आवाज होती तो भी क्या उन पर कोई फर्क पड़ता, जवाब है नही."

अमिताभ ने लिखा कि उन लोगों ने तत्कालिक जीत जरुर हासिल की, लेकिन आखिरकार उनकी हार हुई. उन्होंने अपना पद, शक्ति गवांई लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है उन्होंने अपनी अंतरआत्मा गवाई और आज उनके लिए वही महत्वपूर्ण है और जीवन में अंतरआत्मा की हार सबसे बड़ी हार होती है.

उधर,राज्य सभा सांसद जया बच्चन ने भी कहा कि सच सामने आ गया है. गॉड इज ग्रेट.

संसद भवन के परिसर में पत्रकारों के सवालों के जवाब में जया बच्चन ने कहा कि उन्हें 25 साल से इस सच्चाई का पता था, लेकिन 25 साल की इस पीड़ा की भरपाई कौन करेगा, पुरानी बातों को कैसा मिटाया जाएगा.

संबंधित समाचार