अन्ना ने फिर लिखी प्रधानमंत्री को चिट्ठी

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Image caption लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना हज़ारे के आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला था

समाजसेवी अन्ना हज़ारे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक और चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने प्रधानमंत्री को संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज पर सरकार की ओर से किए गए हस्ताक्षर की याद दिलाई है, जिसमें सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी सख्त कदम उठाने का वादा किया था.

उन्होंने राजनीति में अपराधीकरण की समस्या का अध्ययन करने के लिए गठित वोहरा समिति की सिफ़ारिशों को भी लागू करने का आग्रह किया है.

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक सशक्त लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए आंदोलनरत अन्ना हज़ारे ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया है कि संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों में भी जांच एजेंसियों को प्रभावी और दबावमुक्त कार्य करने के लिए आवश्यक स्वतंत्रता देने की बात कही गई है.

इससे पहले भी अन्ना हज़ारे भ्रष्टाचार और लोकपाल के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुके हैं.

'बदलाव नहीं आया'

अन्ना हज़ारे ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि भारत ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध संयुक्त राष्ट्र के वर्ष 2003 के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर तब किए थे जब उसने देश में भ्रष्टाचार के खतरे को खत्म करने की आवश्यकता समझी थी.

उन्होंने कहा है कि इस प्रस्ताव पर भारत को हस्ताक्षर किए नौ वर्ष बीत चुके हैं पर जमीनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.

अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के बावजूद सरकार भ्रष्टाचार के विरद्ध लड़ने के लिए स्थापित संस्थानों को स्वतंत्र रप से काम करने नहीं दे रही है.

सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा है कि जब तक भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंका नहीं जाएगा तब तक देश का भविष्य धुंधला ही रहेगा.

अन्ना हज़ारे ने अपने पत्र में भ्रष्टाचार उन्मूलन के उपाय सुझाने के लिए 1993 में गठित एनएन वोहरा समिति की रिपोर्ट का भी जिक्र किया है.

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे अपनी व्यस्तता के बीच थोड़ा समय निकाल संयुक्त राष्ट्र के मसौदे और वोहरा समिति की सिफारिशों को दोबारा पढ़ें और उन पर अमल करने की पहले करें.

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