विवाद के बाद राष्ट्रपति ने पुणे वाला मकान छोड़ा

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Image caption प्रतिभा पाटिल ने सेवानिवृत्ति के बाद पुणे में रहने की इच्छा जाहिर की थी

कई तरह के विवादों से घिरने के बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा है कि सेवानिवृत्ति के बाद उनके रहने के लिए पुणे में जो मकान बन रहा था उसे वह छोड़ रही हैं.

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "कुछ लोगों ने उस जगह को युद्ध विधवाओं के निवास से जोड़ा है इसकी वजह से राष्ट्रपति ने पुणे में सेवानिवृत्ति के बाद रहने के लिए मकान के आवंटन को छोड़ने का फैसला किया है."

राष्ट्रपति भवन के इस बयान में पुणे में आवंटित जमीन का जिक्र तो किया गया है लेकिन ये स्पष्ट नहीं किया गया है कि पुणे का आवंटन छोड़ने के बाद सेवानिवृत्ति के बाद उनकी क्या योजना है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के हवाले से कहा है कि दूसरी योजनाओं के बारे में वे बाद में कोई फैसला लेंगीं.

राष्ट्रपति के रुप में प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो रहा है और इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति भवन छोड़ना होगा.

विवाद और खंडन

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "उम्मीद है कि पुणे के आवास के संबंध में इसके बाद से सारी गलतफहमियाँ दूर हो जाएंगीं."

सेवानिवृत्ति के बाद प्रतिभा पाटिल की ओर से पुणे में रहने की इच्छा जाहिर करने के बाद खडकी कैंटोनमेंट इलाके में एक जमीन आवंटित की गई थी.

इस पर विवाद उस समय शुरु हुआ जब एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल सुरेश पाटिल ने प्रतिभा पाटिल के आवास के लिए आवंटित जमीन के विवरण जारी किए, जिसमें बताया गया था कि इसके लिए 2.6 लाख वर्गफुट जमीन आवंटित की जा रही है.

सुरेश पाटिल पुणे स्थित 'जस्टिस फॉर जवान' संस्था के लिए काम करते हैं, जो स्वयंसेवी संगठन 'ग्रीन थंब' का हिस्सा है.

जो विवरण जाहिर किए गए थे, उसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति के लिए जो 4,500 वर्गफुट में एक मकान का निर्माण किया जा रहा है जिसके लिए ब्रिटिश काल की दो इमारतों को गिराया जा रहा है.

हालांकि राष्ट्रपति भवन ने कहा है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है और किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है.

राष्ट्रपति भवन के बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति की सेवानिवृत्ति के बाद निवास को लेकर जो नियम हैं उसका सख्ती से पालन किया गया है.

बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति इस आरोप से आहत हुई हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद अपने आवास के लिए ये जमीन स्वीकार करके उन्होंने युद्ध विधवाओं और पूर्व सैनिकों के प्रति असंवेदनशीलता का परिचय दिया है.

बयान में कहा गया है कि वे पूर्व सैनिकों का पूरा सम्मान करती हैं और पूर्व में भी वे युद्ध विधवाओं की भलाई के लिए काम करती रही हैं.

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