बंगारू को चार साल जेल की सजा

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Image caption शुक्रवार को दिल्ली में एक अदालत ने बंगारू लक्ष्मण को दोषी ठहराया था

सीबीआई की एक विशेष अदालत ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को रिश्वत मामले में चार साल कारावास की सजा सुनाई है.

उनपर एक लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया गया है.

अदालत ने उन्हें एक दिन पहले, 2001 में हुए तहलका के बहुचर्चित स्टिंग ऑपरेशन में एक नकली हथियार सौदे के लिए एक लाख रूपए की रिश्वत लेने का दोषी ठहराया था.

इसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

72 वर्षीय बंगारू लक्ष्मण को शनिवार को दिल्ली की तिहाड़ जेल सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के कंवलजीत अरोड़ा के सामने पेश किया गया.

वहाँ पहले बंगारू लक्ष्मण ने स्वास्थ्य कारणों से अदालत से सज़ा को कम-से-कम रखने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि उनकी दो बार बाइपास सर्जरी हुई है और उन्हें डायबिटीज़ है.

वो चाहते थे कि उन्हें भ्रष्टाचार निरोधी कानून के हिसाब से न्यूनतम छह महीने की सज़ा दी जाए मगर सीबीआई की वकील ने उन्हें इसी कानून के तहत उन्हें अधिकतम पाँच साल की सज़ा दिए जाने का आग्रह किया.

तहलका का स्टिंग ऑपरेशन 2001 में हुआ था जिसमें उन्हें भाजपा मुख्यालय स्थित उनके कमरे में एक लाख रूपए रिश्वत लेते हुए दिखाया गया.

उस समय भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार थी और लक्ष्मण उसके सबसे प्रमुख घटक भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष थे.

तहलका का वीडियो टेप जारी होने के बाद भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया. बंगारू लक्ष्मण ने उसी दिन इस्तीफ़ा दे दिया. दो दिन बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस और समता पार्टी अध्यक्ष जया जेटली ने भी अपने पदों से त्यागपत्र दे दिए.

लक्ष्मण इससे पहले 1999 से 2000 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल राज्यमंत्री भी थे.

तहलका कांड

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Image caption तहलका डॉट कॉम के आरोपों की वजह से बंगारु लक्ष्मण को इस्तीफा देना पड़ा था

भारत की एक वेबसाइट तहलका डॉट कॉम ने 13 मार्च 2001 को एक वीडियो सीडी जारी किया जिसका टीवी चैनलों पर प्रसारण किया गया.

इस सीडी में बंगारू लक्ष्मण को अपने दफ्तर में एक फर्जी रक्षा सौदे के लिए नगद रिश्वत लेते हुए दिखाया गया था.

इस स्टिंग ऑपरेशन में तहलका के पत्रकारों ने खुद को ब्रिटेन की एक फर्जी कंपनी वेस्ट एंड इंटरनेशनल का प्रतनिधि बताकर बंगारू लक्ष्मण से मुलाकात की और उनसे आग्रह किया कि वो हाथ में थामे जा सकनेवाले उनके सैन्य उपकरण - थर्मल इमेजर - की सप्लाई के लिए रक्षा मंत्रालय में उनकी सिफारिश करें.

सीडी प्रसारित होने के 11 दिन बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश के. वेंकटस्वामी की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया.

बाद में वर्ष 2003 में न्यायाधीश वेंकटस्वामी के इस्तीफा देने के बाद जाँच का काम न्यायमूर्ति एस एन फूकन आयोग को सौंपा गया.

फूकन आयोग ने अपनी पहली रिपोर्ट में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस को क्लीन चिट दी थी.

लेकिन 2004 में आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही यूपीए सरकार ने फूकन आयोग को भंग कर जाँच का काम सीबीआई को सौंप दिया.

सीबीआई ने दिसंबर 2004 में बंगारू लक्ष्मण समेत पांच लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कई धाराओं में मामला दर्ज किया.

दो साल बाद 2006 को बंगारू लक्ष्मण के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया.इसके छह साल बाद उन्हें सजा सुनाई गई है.

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