कलेक्टर की रिहाई के लिए समयसीमा बढ़ी

Image caption पॉल की रिहाई के बदले माआवादी अपने साथियों को छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं

छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के लिए तय समयसीमा को दो मई तक के लिए बढ़ा दिया है.

संगठन की दक्षिण क्षेत्रीय कमेटी दंडकारण्य के सचिव गणेश उईके की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अगर तयशुदा समयसीमा के अंदर माओवादियों की मांगें नहीं मानी गईं तो वो सुकमा के कलेक्टर को ‘जन अदालत’ में पेश करेंगे.

माओवादी कलेक्टर को रिहा करने के बदले अपने आठ साथियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा वे नौ अन्य लोगों की रिहाई भी चाहते हैं जो उनके मुताबिक झूठे मुक़दमों में फंसाए गए हैं.

माओवादियों की तरफ से ये विज्ञप्ति 29 अप्रैल को जारी की गई. यानी उसी दिन जब माओवादियों के वार्ताकार ब्रह्मदेव शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल नक्सली नेताओं से सुकमा के ताड़मेटला के जंगलों में मिलकर बाहर आए थे. ये विज्ञप्ति रायपुर में एक पत्रकार के हाथ में दी गई है.

'कलेक्टर युद्ध बंदी'

माओवादियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की सरकार 'कलेक्टर की रिहाई' और उनके संगठन के कार्यकर्ताओं की रिहाई को लेकर गंभीर नहीं है. संगठन का कहना है कि दोनों वार्ताकार उनसे मिलने तो आए थे लेकिन उनके पास सरकार की तरफ से कोई संदेश नहीं था.

संगठन ने ये भी आरोप लगाया है कि सरकार ने कलेक्टर का पता लगाने के लिए टोही विमान भी लगाया हुआ है. उनका ये भी कहना है कि इस दौरान अर्द्धसैनिक और पुलिस की गश्त जंगलों में जारी है.

विज्ञप्ति में कहा गया है, "सुकमा कलेक्टर को हमने एक युद्ध बंदी की तरह क्रांतिकारी जनता और पीपल्स लिबेरशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की निगरानी में बंदी बनाकर रखा है. हम सुकमा के कलेक्टर की रिहाई के बदले अपनी पार्टी के 8 कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा कर बंदियों के अदला बदली के लिए समयसीमा 2 मई 2012 तय कर रहे हैं."

माओवादियों का कहना है कि वे सुकमा के कलेक्टर को ज्यादा दिनों तक बंदी बनाकर नहीं रखना चाहते हैं. वे ये भी कहते हैं कि शर्तें मान ली जाने पर वे कलेक्टर को अपने वार्ताकारों के सामने सौंपेंगे.

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