राजीव के हत्यारों की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में

राजीव गांधी
Image caption एक महिला आत्मघाती हमलावर ने 21 मई, 1991 को श्रीपेरुंबुदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या के दोषी पाए गए लोगों की क्षमा याचिका संबंधी सभी मामलो की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में ही करने का आदेश सुनाया है.

राजीव गांधी की हत्या के दोषी पाए गए संथन, मुरुगन और पेरारीवलन को पिछले साल सितंबर में ही फांसी दी जानी थी. उनकी तरफ से मद्रास उच्च न्यायालय में दया याचिका दायर की गई थी जो खारिज कर दी गई.

क्षमा याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में चल रहे मामले को सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित किए जाने के लिए चेन्नई के एक राजनीतिक कार्यकर्ता एलएस वेंकट ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी.

वेंकट के वकील नंद कुमार ने बीबीसी से कहा, ''अगर हर एक अदालत में इस तरह के मामले दाखिल करके फैसले सुनाए जाते रहे, तो ये विवाद का कारण बन जाएगा. सुप्रीम कोर्ट की ताकत है कि इस तरह के एक जैसे मामलों को संज्ञान मे लेकर वो सुनवाई करे. ये जिस तरह का हाई प्रोफाइल मामला है उसमें अदालत पर राजनातिक दबाव बनाने की कोशिश भी स्वाभाविक है.''

इससे पहले मुकदमे की अवधि के लिए मद्रास हाई कोर्ट ने तीनों की फांसी पर रोक लगा दी थी.

तीनों की तरफ से दलील दी गई कि राष्ट्रपति कार्यालय ने दया याचिका पर सुनवाई करने में बहुत देरी की है.

क्षमा याचिका

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के तीन हत्यारों की क्षमा याचिका को पिछले साल ख़ारिज कर दिया था जिसके खिलाफ ये मुकदमा दायर किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1999 में तमिल टाइगर मुरुगन, सांतन, पेरारिवलन और नलिनी को मौत की सज़ा की पुष्टि की थी.

बाद में नलिनी के मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था.

मौत की सज़ा पाने वाले तीन लोगों पर आत्मघाती हमले की साज़िश रचने और उसे अंजाम तक पहुँचाने का आरोप था.

महिला आत्मघाती हमलावर ने 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर में एक चुनावी सभा को संबोधित करने गए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी.

उनके साथ इस हमले में बीस से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

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