छत्तीसगढ़ में मध्यस्थ गए कलेक्टर मेनन को लेने

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Image caption मेनन की रिहाई के लिए सरकार और माओवादियों के बीच एक समझौता हुआ है

छत्तीसगढ़ में माओवादियों की ओर से अगवा किए गए सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को रिहा करवाने के लिए दोनों मध्यस्थ सुकमा पहुँच चुके हैं.

अब से कुछ देर पहले दोनों वार्ताकार बीडी शर्मा और प्रोफ़ेसर हरगोपाल ताड़मेटला से अंदर जंगल की ओर गए हैं.

माओवादियों के कमांडर महेश ने बीबीसी हिंदी से कहा है कि कलेक्टर मेनन सुरक्षित हैं और दोनों वार्ताकार उन्हें लेकर जल्द ही आएँगे.

उन्होंने पत्रकारों को ताड़मेटला से चिंतलनार तक भेज दिया है और वहीं इंतज़ार करने को कहा गया है.

इससे पहले माओवादियों ने बीबीसी हिंदी को भेजे एक संदेश में कहा था कि वो अपह्त कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को तीन मई के दिन बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल को जनता के सामने सौंपेंगे.

कलेक्टर का गत 21 अप्रैल को माओवादियों ने अपहरण कर लिया था.

समझौता

ताड़मेटला वही जगह है जहाँ पर माओवादियों ने अपने वार्ताकारों को बुलाया था और उनके साथ जंगल में लंबी चर्चा की थी.

माओवादियों ने बताया कि जेल में बंद उनके साथियों की रिहाई को लेकर उनके वार्ताकारों का सरकार से समझौता हुआ है.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने माओवादियों से हुए समझौते को 'ऐतिहासिक' बताया और कहा है कि ये एक उदाहरण है कि ऐसी परिस्थितियों में किस तरह का समझौता होना चाहिए. सवाल

लेकिन वार्ताकारों के समझौते के बाद से ऐसे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं जिनके जवाब इस समझौते में भी नहीं मिलते.

माओवादी पहले मांग कर रहे थे कि अबूझमाढ़ इलाके से सुरक्षा बलों को हटा लिया जाए लेकिन यह बात इसमें शामिल नहीं है.

माओवादी अपने खिलाफ सुरक्षा बलों के जिस ग्रीनहंट ऑपरेशन को बंद करने की मांग करते रहे हैं उसका भी इस समझौते में कोई जिक्र नहीं है.

समझौते के मुताबिक सरकार ने कुछ माओवादियों को रिहा करने पर कोई सहमति नहीं जताई है और सिर्फ़ ये कहा है कि कुछ मामलों पर पुनर्विचार के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा. जबकि माओवादी अपने कई नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे थे जिसके बदले में वे कलेक्टर मेनन को रिहा करेंगे.

ऐसे में कलेक्टर की रिहाई के लिए सरकार और माओवादियों के बीच कुछ समझौते को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

माफ़ी मांगी

Image caption माओवादियों ने कहा है कि वे जनता के सामने कलेक्टर को रिहा करेंगे

बीडी शर्मा और प्रोफ़ेसर हरगोपाल के जंगल के भीतर जाने से पहले माओवादियों ने मुझे आवाज़ देकर भीतर बुलवाया और वहाँ माओवादियों के कमांडर महेश ने पत्रकारों के साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए माओवादियों की ओर से माफ़ी मांगी.

बीबीसी हिंदी ने अपने सुबह के कार्यक्रम नमस्कार भारत में ये ख़बर प्रसारित की थी कि ताड़मेटला में कुछ माओवादियों ने पत्रकारों को वहाँ से चले जाने को कहा और धमकी दी कि अगर वे नहीं गए तो उन्हें गोली मार दी जाएगी.

इस ख़बर में बताया गया था कि इससे पहले जिस दिन बीडी शर्मा और प्रोफ़ेसर हरगोपाल पहली बार माओवादियों से चर्चा करने के लिए जा रहे थे, उस दिन भी माओवादियों ने पत्रकारों की तलाशी ली थी.

टेलीविज़न चैनलों के पत्रकारों ने बीबीसी को बताया था कि उनके ओबी वैन के ड्राइवरों को भी धमकाया गया था.

इसकी वजह से पत्रकारों के भीतर एक तरह का डर था और वे सवाल पूछ रहे थे कि अगर ताड़मेटला में माओवादी कलेक्टर को रिहा करेंगे तो इसके कवरेज के लिए ताड़मेटला जाना होगा लेकिन ऐसी धमकियों के बीच वहाँ कैसे जा सकेंगे.

इन ख़बरों के प्रसारित होने के बाद माओवादियों ने बीबीसी के ज़रिए पत्रकारों से माफ़ी मांगी है.

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