गुजरात दंगे: ओड में तीन की हत्या के लिए नौ को उम्र कैद

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Image caption ओड में हुए दंगों में दो मामलों पर फ़ैसला आ गया है लेकिन तीसरे मामले की अब भी जांच हो रही है.

गुजरात के आणंद जिले के ओड गाँव में साल 2002 के दंगों के दौरान के एक मामले पर स्थानीय अदालत ने नौ लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.

विशेष अदालत के न्यायाधीश ने इन नौ लोगों को हत्या, दंगे और आपराधिक षंडयंत्र का दोषी पाया है. अदालत ने एक व्यक्ति को छह माह की सज़ा भी सुनाई है.

शुक्रवार को विशेष अदालत द्वारा सुनाए गए फ़ैसले वाले मामले में एक मार्च 2002 को ओड में रहने वाले केदार वोहरा, आयशा वोहरा और नूरी वोहरा को उनके घर में जिंदा जला दिया गया था.

इस मुकदमें पर फ़ैसले सुनाते हुए अदालत 17 लोगों की बरी किया और 13 अन्य के विरुद्ध संदेह का लाभ देते छोड़ दिया है.

साल 2002 में हुए दंगों में ओड गांव का ये दूसरा मामला है जिसमें अदालत ने अपना फ़ैसला सुनाया है. इसी गांव में दंगों के दौरान हत्या के तीसरे केस की जांच एसआईटी कर रही है.

एफ़आईआर में 43 लोगों को नामजद किया गया था. इनमें से दो लोग देश छोड़कर भाग गए थे और ज़मानत मिलने के बाद लोग लोग भगौड़े हो गए थे और अब भी गायब हैं.

इस मामले जांच पहले गुजरात पुलिस ने की थी लेकिन बाद में इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम यानि एसआईटी के हवाले कर दिया गया था.

इससे पहले ओड में ही साल 2002 में हुए दंगों के दौरान हुए एक नरसंहार के लिए 12 अप्रैल को एक विशेष अदालत ने 18 लोगों को आजीवन कारावास और सात को पांच साल सज़ा सुनाई थी.

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