एनसीटीसी: केंद्र से सहमत नहीं कई राज्य

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Image caption नवीन पटनायक ने एनसीटीसी के विरोध का झंडा सबसे पहले बुलंद किया था

राष्‍ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र यानी एनसीटीसी पर केंद्र की राज्यों को मनाने की कोशिशें नाकाम रही हैं.

शनिवार को नई दिल्ली में इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए केंद्र की ओर से बुलाई गई मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद ये बात साफ हो गई कि इसके खिलाफ विरोध के स्वर कम होने की जगह और मुखर हो गए हैं.

मुख्यमंत्रियों ने इस प्रस्ताव को वापिस लेने से इसमें संशोधन करने तक की बात कही है. ऐसा मांग करने वालों में यूपीए में शामिल तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी भी शामिल हैं.

मुख्यमंत्रियों की ओर से एनसीटीसी के गठन का विरोध किए जाने के बाद केद्र सरकार ने शनिवार को दिल्ली में एक दिन की बैठक बुलाई थी.

इसकी शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि एनसीटीसी का मक़सद राज्य की शक्तियों को कम करना नहीं है और वे चाहते हैं कि राज्य अपने सुझाव दें जिससे इसके ढाँचे में सुधार किया जा सके.

लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्रियों ने उनकी अपील को अनसुना कर दिया.

तीखा विरोध

इस मुद्दे पर कड़ा रूख अपनाते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार (स्वतंत्रतापूर्व के) वायसरॉय की तरह काम कर रही है. केंद्र की नीतियों को गलत बताते हुए मोदी ने कहा कि एनसीटीसी के जरिए सरकार तानाशाही रवैया अपनाना चाहती है और इससे कानून व्यवस्था बिगड़ेगी.

मोदी ने कहा, “ज्यादातर राज्य सरकारें इस एजेंसी का विरोध कर रही हैं. मैं केंद्र से आग्रह करूंगा कि वो इसे प्रतिष्ठा का विषय न बनाए और राज्यों ने जो मांग की है उसे स्वीकार करते हुए इस प्रस्ताव को वापिस ले.”

एनसीटीसी की एक और मुखर विरोधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और यूपीए के घटक दल तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने भी केंद्र से एनसीटीसी वापिस लेने के लिए कहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्यों से सलाह किए बिना एनसीटीसी लागू करने की कोशिश की.

उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि केंद्र और राज्य पुलिस को मिलकर काम करना चाहिए. लोगों के बीच ये संदेश नहीं जाना चाहिए कि केंद्र ऐसा मुद्दा थोपने की कोशिश कर रही है जो देश के संघीय ढांचे के मुताबिक नहीं है और एनसीटीसी तो संघीय ढांचे के बिल्कुल खिलाफ है. इसलिए मैंने केंद्र सरकार से कहा है कि वो इसे वापिस ले.”

हालांकि ममता बैनर्जी ने ये भी कहा कि आंतकवाद से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए लेकिन कानून व्यवस्था राज्य का अधिकार है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का कहना था कि उन्हें एनसीटीसी मंजूर नहीं है और एनसीटीसी को आईबी का हिस्सा नहीं होना चाहिए क्योंकि आईबी पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है.

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा, "हम केंद्र सरकार के इस कदम के खिलाफ हैं क्योंकि ये संघीय ढांचे के खिलाफ है."

यहां तक कि कांग्रेस शासित असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने भी कुछ हद तक एनसीटीसी का विरोध किया है.

उनका कहना था, “हम इसका समर्थन करते हैं लेकिन कुछ शर्तों के साथ. जहां तक मुमकिन है केंद्र को राज्य सरकारों को भरोसे में लेना चाहिए और दोंनो को मिलकर काम करना चाहिए."

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Image caption गृहमंत्री पी चिदंबरम का मानना है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए एनसीटीसी जैसी संस्था जरूरी है.

वहीं जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्लाह का कहना था कि एनसीटीसी का मौजूदा स्वरूप अफस्पा की तरह है जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इसे असंवैधानिक बताया.

'एनसीटीसी जरूरी'

बैठक के बाद पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने मुख्यमंत्रियों की आपत्तियों की चर्चा की. उन्होंने कहा कि तीन मुख्यमंत्रियों ने सीधे तौर पर एनसीटीसी को अस्वीकार कर दिया जबकि कुछ ने इसका समर्थन किया और कुछ ने शर्तों सहित समर्थन किया.

गृह मंत्री के मुताबिक मुख्यमंत्रियों की मुख्य आपत्तियां हैं. एक तो ये एनसीटीसी, आईबी, के तहत क्यों है और दूसरा, विशेष परिस्थितियों में भी एनसीटीसी को खुद (बिना राज्य सरकार की अनुमति के) कार्रवाई करने का अधिकार क्यों हो.

मुख्यमंत्रियों की इन चिंताओं पर खुले दिमाग से विचार करने की बात करते हुए पी चिदंबरम ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को आतंकवाद से जिस तरह के खतरे हैं उन्हें देखते हुए खुफिया तंत्र और जांच करने वाली संस्थाओं के बीच के फासले को सिर्फ पुलिस विभाग नहीं भर सकता.

उन्होंने कहा कि इसके लिए एनसीटीसी या कोई और संस्था इस जगह को भर सकता है. लेकिन उस संस्था को कुछ खास अधिकार देने होंगे.

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