डीआरडीओ: भारत में मिसाइल रक्षा कवच तैयार

 रविवार, 6 मई, 2012 को 19:38 IST तक के समाचार
विजय कुमार सारस्वत

अब डीआरडीओ 'मिसाइल सुरक्षा कवच' के दूसरे चरण के विकास में जुटेगा जिसे पूरा करने का लक्ष्य 2016 तक रखा गया है.

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने भारत के कम से कम दो शहरों की रक्षा के लिए ‘मिसाइल रक्षा कवच’ विकसित कर लिया है.

ये प्रणाली विश्व में गिने-चुने देशों के पास ही है.

डीआरडीओ के प्रमुख वीके सारस्वत ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि इस प्रणाली की सहायता से दो हज़ार किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल को तबाह किया जा सकता है.

इस प्रणाली की सहायता से साल 2016 तक पांच हज़ार किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलों को भी ध्वस्त किया जा सकेगा.

इस मिसाइल रक्षा कवच का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया गया है.

डीआरडीओ प्रमुख वीके सारस्वत पीटीआई को बताया, “मिसाइल रक्षा कवच अब परिपक्व हो चुकी है. हम इसके पहले चरण को तैनात करने के लिए तैयार हैं और इसे बहुत कम समय में तैनात किया जा सकता है.”

'तैनाती का फैसला राजनीतिक स्तर पर'

वीके सारस्वत ने कहा कि पहले चरण के तहत मिसाइल रक्षा कवच को देश के दो जगहों पर तैनात किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि मिसाइल कवच की तैनाती के लिए दो स्थान चिन्हित नहीं किए गए हैं और इनका चयन राजनीतिक स्तर पर होगा.

डीआरडीओ ने परीक्षण के दौरान पृथ्वी मिसाइलों का प्रयोग किया जिन्हें मिसाइल रक्षा कवच से कामयाबी से रोक लिया. वीके सारस्वत ने कहा कि डीआरडीओ ने इस प्रणाली के छह कामयाब परीक्षण किए हैं.

उन्होंने कहा कि मिसाइल रक्षा कवच को परिपक्व करने वाले सभी तत्व जैसे लंबी रेंज के रेडार, लाइव डेटा-लिंक और मिशन कंट्रोल प्रणाली को सफलतापूर्वक तैयार कर लिया गया है.

अब दूसरे चरण में डीआरडीओ पांच हज़ार किलोमीटर तक की मिसाइलों से रक्षा के लिए प्रणाली तैयार करेगा. इसके लिए 2016 का लक्ष्य रखा गया है.

वीके सारस्वत ने पीटीआई को बताया कि भारत की मिसाइल रक्षा कवच की तुलना अमरीका की पैट्रियोट-3 प्रणाली से की जा सकती है, जिसे 1990 में खाड़ी युद्ध के दौरान इराक़ के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रयोग में लाया गया था.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.