भ्रूण हत्या के लिए बन सकेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट?

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Image caption क्या आमिर की अपील से भ्रूण हत्याएं रुक जाएंगी

फिल्म अभिनेता आमिर खान कोख में कत्ल की जा रही बेटियों की हिमायत में आ खड़े हुए है. बॉलीवुड स्टार आमिर ने कन्या भ्रूण हत्या पर अपने कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' में पुत्रियों की परवरिश का आह्वान किया और जब राजस्थान में एक स्टिंग ओपरेशंन के जरिये बेनकाब हुए चिकित्सको का जिक्र आया तो आमिर ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

वो कहने लगे मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री को खत लिखूंगा और इन चिकित्सको के विरुद्ध चल रहे मुकदमे फास्ट ट्रेस्क कोर्ट को सौंपने का आग्रह करूँगा.

राजस्थान में कोई सात साल पहले दो टीवी पत्रकारों श्रीपाल श्कतावत और मीना शर्मा ने अपना एक साल लगाया और घूम घूम कर राजस्थान सहित चार राज्यों -मध्य परदेश,उत्तर प्रदेश और गुजरात -में एक सौ चालीस डॉक्टरो के विरुद्ध स्टिंग ऑपरेशन किया जो कथित रूप से गर्भ में पल रहे शिशु की पहचान बताते और फिर कोख में कत्ल करने में मदद करते.

आमिर ने अपने इस कार्यक्रम में इन दोनों पत्रकारों को भी शामिल किया और उनके किरदार की सराहना की. बॉलीवुड स्टार ने मौजूद लोगो के सम्मुख बेटियों की महत्ता बयां की और जज्बाती होकर लोगो से कहा हर आम ओ खास का फर्ज है कि वो अब बेटियों की हिफाजत में खड़ा हो.

आमिर ने लोगो से कहा वो जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखेंगे और फास्ट ट्रेस्क कोर्ट स्थापित करने की मांग करेंगे. टीवी पत्रकार मीना शर्मा आमिर की इस पहल से बहुत अभिभूत हुई. बकौल मीना शर्मा, वर्ष 2005 से लेकर 2006 तक पूरे समय उन्होंने स्टिंग ओपरेशन को दिया.

वो कहती हैं, ''इसके लिए गांव गांव कसबे कसबे डॉक्टरो के क्लीनिको और अस्पतालों की खाक छानी, बड़ा जोखिम का काम था. फिर हर समय पांच माह की गर्भवती महिला को साथ लेकर घूमना बड़ा दुश्वार काम था.फिर भी हमें संतोष है हम समाज के सामने सच उजागर कर पाए.''

Image caption आमिर खान ने यह कार्यक्रम स्टार इंडिया के लिए बनाया है

मीना की मुताबिक इन एक सौ चालीस में महज बारह डॉक्टर ऐसे थे जिन्होंने साफ़ साफ़ भ्रूण परीक्षण और हत्या से मना कर दिया. इनमे राजस्थान के 85 मामले थे. इनमे से 56 के खिलाफ कार्रवाई हुई. कुछ मामले अब भी अदालत में चल रहे है.

महिला अधिकार कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव के अनुसार तीस मामलों में कार्रवाई चल रही है. वो कहती हैं, ''हम आमिर खान की पहल का स्वागत करते है.हालाँकि कानूनन अभी फास्ट ट्रेक कोर्ट स्थापित होना मुशिकल है. क्योंकि इसमें कानूनी बाधा है. ''

स्टिंग ऑपरेशन के बाद महिला संगठनो के दबाव के चलते इन डॉक्टरो के विरुद्ध कार्रवाई की गई ,कुछ को मेडिकल कौसिल ने थोड़े समय के लिए काम से बाहर कर दिया.मगर अब समय के साथ पहले सरकार भूली और फिर समाज खुद भूल गया.

कविता श्रीवास्तव के मुताबिक अभी कन्या भ्रूण परीक्षण और भ्रूण हत्या के कोई साढ तीन सौ मामले अदालतों में चल रहे है. राजस्थांन के कुछ जिलो में पैदा होते ही बेटियों को मारने की परम्परा रही है.मगर आधुनिक विज्ञान के साथ नए उपकरण आ गए और अजन्मी बच्ची के लिए कोख में अपना बचाव करना और भी दुश्वार होता जा रहा है. राजथान में अभी एक हजार लडको के बराबर महज 884 लडकिया है.क्योंकि वो मानसिकता अब भी बलवान है कि बेटी तो धन ही पराया है ,बेटा कैसा भी हो,वो होनहार कुनबे का

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