जो आपको मारना चाहते हैं, उनका पीछा करना होगा: हिलेरी

हिलरी इमेज कॉपीरइट AP
Image caption हिलरी के अनुसार अमरीका एफडीआई और नागरिक परमाणु सहभागिता जैसे मामलों पर चर्चा चाहता है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ जंग में उतना काम नहीं किया है जितना भारत या अमरीका चाहते थे और संभवत: पाकिस्तान में छिपे अयमन जवाहिरी जैसे अल कायदा नेताओं को खोजने की जरूरत है.

अपनी भारत यात्रा में कोलकाता पहुँची अमरीका की विदेश मंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान ये विचार व्यक्त किए हैं.

उधर पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी ने इस विषय पर कहा, "यदि अमरीका के पास जवाहिरी की पाकिस्तान में मौजूदगी के बारे में कोई विशेष खुफिया जानकारी है तो उसे वो उपलब्ध करानी चाहिए. अल कायदा पाकिस्तान का दुश्मन है. भारत में ऐसा बयान देने से प्रतीत होता है कि ये भारत को खुश करने और पाकिस्तान पर दबाव बनाने की कोशिश है."

हिलेरी ने ये भी कहा कि ये अच्छा है कि भारत ने ईरान से तेल आयात घटाया है लेकिन उन्होंने जोर देकर ये भी कहा कि इस दिशा में और अधिक कदम उठाए जाने की जरूरत है. उन्होंने ये भी कहा कि पूर्वी भारत में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं.

'अमरीका जवाहिरी तक पहुँचना चाहता है'

क्लिंटन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अल कायदा के कई नेता भगोड़े हैं और ओसामा बिन लादेन के बाद अल कायदा का नेतृत्व संभालने वाले अयमन अल जवाहिरी संभवत: पाकिस्तान में हैं और अमरीका उन तक पहुँचना चाहता है.

हिलेरी ने कहा कि अमरीका जानता है कि पाकिस्तान की सरकार ने अभी हाफिज सईद को अदालत में दोषी ठहराए जाने के विषय पर कदम नहीं उठाए हैं और अमरीका पाकिस्तान को इसका एहसास दिलाता रहेगा.

हिलेरी क्लिंटन का कहना था, "जो लोग आपको मारने की कोशिश कर रहे हैं, आपको उन्हें खोज निकालना होगा. इस पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए...हम मुंबई हमलों से जुड़े हर किसी व्यक्ति को न्याय के कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं. हम आपके (भारतीयों के) साथ खड़े हैं और ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं."

अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा, "हम अल कायदा को निष्क्रिय करना चाहते हैं. हमें काफी सफलता मिली है. कई प्रमुख नेता अभी भगोड़े हैं. हमारा मानना है कि बिन लादेन के बाद नेतृत्व संभालने वाले जवाहिरी पाकिस्तान में हैं और हम उन्हें खोजना चाहते हैं. पाकिस्तान ने अमरीका या भारत के मुकाबले अधिक लोग खोए हैं. आतंकवादी हमलों में ही 30 हजार से अधिक पाकिस्तानी लोग मारे गए हैं. ये पाकिस्तान के हित में है कि वह इस समस्या का सामना करे."

'पूर्वी भारत में अपार संभावनाएँ'

उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं. ममता बनर्जी के साथ हिलेरी की बैठक के बाद पत्रकारों को सबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अमरीका ने राज्य में विकास कार्यो के लिए निवेश करने की इच्छा जताई है.

ममता बनर्जी ने कहा, "हिलरी क्लिंटन ने पश्चिम बंगाल मे हो रहे सुधार कार्यों पर हमे बधाई दी है. अमरीका हमारे साथ विकास कार्यों में भागीदारी करना चाहता है. हमने भी सूचना और प्रौद्योगिकी, पर्यटन और फिल्म निर्माण समेत अन्य कई क्षेत्रों में विकास के लिए इनसे मदद मांगी है."

ममता बनर्जी राहत पैकेज के लिए और बंगाल के कर्ज पर ब्याज माफ किए जाने के लिए केन्द्र पर लगातार दबाव बना रही है, इस बीच अमरीका की ओर से मदद के आश्वासन से उनको राहत की उम्मीद जरूर जगी है.

हिलेरी ने समारोह में कहा कि पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था के साथ ही इसका राजनीतिक महत्व भी बहुत है. उनका कहना है कि अमरीका पूरे देश के साथ सहभागिता निभाना चाहता है और उनका कोलकाता आना देश के इस भाग के प्रति अमरीका की प्रतिबद्धता दर्शाता है.

हिलेरी का कहना है कि वो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से उनकी योजनाओं के बारे में जानना चाहती है.

उन्होंने कहा, ''वक्त बीतने के साथ भारत अपने दरवाजें जितना खोलेगा उतने ही विकास और बेहतरी के अवसर यहां आएंगे. मै इस विश्वास के साथ यहां आई हूं कि भारत कही भी और किसी से भी प्रतियोगिता कर सकता है. लेकिन मै राजनीति भी समझती हूं, जानती हूं कि ये फैसले कितने कठिन हो सकते है.''

विदेशी निवेश की मंशा

हिलेरी ने कहा कि अमरीका भारत के खुदरा बाजार में विदेशी निवेश की मंशा रखता है और इस बारे में वो ममता बनर्जी से बात करेंगी.

उन्होंने कहा, ''उत्पादों के वितरण से जुड़ी प्रक्रिया में अमरीका अपना अनुभव भारत के साथ बांट सकता है. छोटे-बड़े उत्पादकों से रिश्ते बनाने में भी अमरीका मदद कर सकता है. हमें सभी के लिए फायदे की स्थिति बनानी होगी.''

हिलेरी के अनुसार अमरीका एफडीआई और नागरिक परमाणु सहभागिता जैसे मामलों पर चर्चा चाहता है.

देशों के बीच पानी के बंटवारे से जुड़े मतभेदों पर हिलेरी ने कहा कि सभी देशों को एकजुट होकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के तौर पर इस तरह के मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए.

ईरान से तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर हिलेरी ने कहा कि ईरान के परमाणु हथियार बनाने के कार्यक्रम की वजह से दुनिया के उस भाग में हथियार बनाने की होड़ शुरू हो जाने का डर रहेगा.

ईरान से 'खतरा'

उन्होंने कहा, ''ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम से इसराइल को खतरा है. हम ईरान पर दबाव बनाकर परमाणु हथियार बनाने के उसके इरादे को बदलना चाहते थे. ईरान पहले ही अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर चुका है. उसने परमाणु अप्रसार संधि पर भी हस्ताक्षर नहीं किए है.''

हिलेरी का कहना है कि इस मुद्दे पर अमरीका को अंतरराष्ट्रीय सहमति मिल चुकी है और ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद वो एक बार फिर चर्चा में शामिल होने पर राजी हो गया है.

उन्होंने कहा, ''ईरान पर इसी दबाव को बनाए रखने के लिए भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ से कहा जा रहा है कि वो ईरान से तेल आयात कम करें. तेल की जरूरतें पूरी करने के लिए सउदी अरब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्पलाई बढ़ा रहा है.''

चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई के मामले पर हिलेरी ने कहा कि अमरीका अलकायदा को पूरी तरह से निष्क्रिय करना चाहता है और उनका मानना है कि संगठन का प्रमुख आयमान अल जवाहिरी पाकिस्तान में ही है.

संबंधित समाचार