आमिर खान मिलेंगे अशोक गहलोत से

आमिर खान
Image caption आमिर खान ने अपने टीवी कार्यक्रम के पहले एपिसोड में भारत में व्याप्त कन्या भूण हत्या पर चर्चा की है.

बॉलीवुड स्टार आमिर खान ने कन्या भ्रूण परीक्षण और उनकी हत्या के मुद्दे को बहुत गंभीरता से लिया है. वे इस सिलसिले में बुधवार को जयपुर में मुख्य मंत्री अशोक गहलोत से मिलने वाले है.

आमिर खान चाहते हैं कि ऐसे मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट सुनवाई करे.

इस बीच राजस्थान ने अपने पड़ोसी गुजरात को सीमावर्ती बनासकांठा जिले में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रूण परीक्षण करने के लिए लगाई गई सोनोग्राफी केन्द्रों पर कार्रवाई करने को कहा है.

गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि हर रोज बड़ी तादाद में गर्भवती महिलाये इलाज के नाम पर राजस्थान से बनासकांठा जाती है. हालांकि गुजरात के बनासकांठा में अधिकारिओ ने इसे गलत बताया है.

आमिर खान ने अपने टीवी कार्यक्रम 'सत्य मेव जयते' में कन्या भ्रूण परीक्षण और फिर कोख में उनके कत्ल को बड़ी शिद्दत से उठाया है.

पत्रकारों की भूमिका

इसमें आमिर खान ने राजस्थान के दो पत्रकारों - श्रीपाल शक्तावत और मीना शर्मा के उन प्रयासो को जगह दी है जिसमे टीवी स्टिंग ऑपरेशान के जरिये भारत के चार राज्यों में सोनोग्राफी केन्द्रों पर भ्रूण परीक्षण होने का खुलासा किया गया था.

इन पत्रकारों ने वर्ष 2005 से 2006 में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में एक सौ डॉक्टरो के क्लिनिकों पर स्टिंग ओपरेशंन किया था.

इनमे कोई 83 मामले राजस्थान के थे. आमिर अब इन मामलों में सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन चाहते है. इसी सिलसिले में वे श्री गहलोत से मिलने वाले है.

उधर राजस्थान सरकार कोख में कत्ल और भ्रूण परीक्षण को रोकने के लिए और हरकत में आई है.

'फल-फूल रहा है लिंग परिक्षण का बाजार'

राजस्थान सरकार को सूचना मिली है कि राज्य की सीमा से सटे गुजरात के बनासकांठा जिले में लिंग परिक्षण का काम खूब फल फूल रहा है. इसमें न केवल सामाजिक संगठनों को बल्कि सरकार को भी चिंता में डाल दिया है.

राज्य के स्वाथ्य सचिव बीएन शर्मा ने गुजरात में अधिकारिओ को चिठ्ठी लिखकर बनासकांठा में सोनोग्राफी केन्द्रों पर कार्रवाई का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा, ''हमें सूचना मिली है कि राज्य के सीमावर्ती जिलो से बड़ी तादाद में लोग बनासकांठा जिले में स्थापित इन केन्द्रों पर लिंग परीक्षण के लिए जाते है और ये पता कर लेते है गर्भस्थ शिशु बेटा है या बेटी, हमारे सीमावर्ती जिलो में इससे लिंग अनुपात गड़बड़ाने का खतरा पैदा हो गया है."

राज्य के स्वाथ्य सचिव का कहना है कि ये दूसरी बार है जब गुजरात सरकार को इस बारे में लिखा गया है.

गुजरात की सीमा पर बसे सिरोही जिले के रेवदर कसबे में एक गैरसरकारी संगठन 'सारद' के मुख्य कार्यकारी बृजमोहन शर्मा के मुताबिक, हर रोज कोई पच्चीस हजार लोग इलाज के लिए राजस्थान के सिरोही, जालोर, पाली, बाड़मेर और जैसलमेर जिलो से बनासकांठा जिले में दाखिल होते है.

इन लोगों में से लगभग सात हजार औरते होती और इनमे भी करीब ढाई हजार गर्भवती महिलाये होती है.

बृजमोहन शर्मा न कहा, ''वहा लिंग परीक्षण किया जाता है. हमने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल की तो पता चला हालत बहुत गंभीर है."

मुखबिर योजना

बनासकांठा के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी अरुण आचार्य इससे सहमत नहीं है.

उन्होने कहा, "हम पूरी तरह सजग है. इन केन्द्रों की नियमित जांच के आलावा आकस्मिक जांच भी की जाती है. मुझे नहीं मालूम राजस्थान के अधिकारी ये मुद्दा क्यों उठा रहे है."

आचार्य के मुताबिक जिले में कोई 141 सोनोग्राफी केंद्र कार्यरत है, मगर गैर सरकारी संस्थाओं का दावा है कि इससे ज्यादा गैर पंजीकृत सोनोग्राफी मशीने काम कर रही है.

राजस्थान ने कन्या भ्रूण परीक्षण में लिप्त लोगो का सुराग देने वालो के लिए इनामी 'मुखबिर' या भेदिया योजना शुरू की है.

इसके तहत किसी सोनोग्राफी केंद्र और डॉक्टर के लिंग परीक्षण में शामिल होने की सूचना देने वाले को एक लाख रूपये तक इनाम दिए जाने का ऐलान किया गया है.

राज्य में बालक-बालिकाओ के अनुपात में बड़ा फर्क आया है. महिला अधिकार कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव के मुताबिक राज्य में एक हजार बालको की तुलना में 884 बालिकाएं हैं.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब आधुनिक विज्ञान नहीं था और लोकतान्त्रिक निजाम भी नहीं था, तब भी उसे कोख में मारा जाता था. मगर नया जमाना आया तो भी अजन्मी कन्या के लिए खतरे कम नहीं हुए.

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