विशेष स्कूलों में कमी के बावजूद और शिक्षक बर्खास्त

स्कूल (फाइल)
Image caption शिक्षकों के हटाए जाने का विरोध अभिवावक भी कर रहे हैं.

महाराष्ट्र में विकलांग छात्रों के लिए विशेष स्कूलों में शिक्षकों की सख्त कमी के बावजूद मुंबई प्रशासन ने लगभग 100 शिक्षकों और कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है.

शिक्षक और कर्मचारी इसके विरोध में धरने पर हैं. शहर के ऐसे 27 स्कूलों में पढ़ाने वाले 99 शिक्षकों को डेढ़ साल पहले अचानक नौकरियों से निकाल दिया गया था.

इन शिक्षकों के प्रतिनिधि राजेंद्र कमुडे कहते हैं, "हम 2001 से स्कूल में टीचर रहे. साल 2005 में हमें स्थायी नौकरी दी गई लेकिन 2010 में ये कह कर निकाल दिया गया कि हमारे पास नो ओब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं हैं. वो हमें इसलिए हासिल करना था कि हमें बंद हुए स्कूलों के शिक्षकों की जगह नौकरी दी गई थी. लेकिन केवल कुछ ही शिक्षकों को ये सर्टिफिकेट दिया गया है."

विकलांग बच्चों के माता-पिता के संगठन ने शिक्षकों की तरफ से आवाज़ उठाई जिसके बाद कई शिक्षकों को नो ओब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिल गया लेकिन उनकी तनख्वाह छटे वेतन आयोग के हिसाब से नहीं मिली.

दिक्कतें

राजेंद्र कमुडे के एक साथी शिक्षक अलोक कहते हैं वो डेढ़ साल से बेरोजगार हैं.

"हमने होम लोन लिया हुआ था लेकिन नौकरी से निकाले जाने के बाद हमें घर बेचना पड़ा. अब हम कहाँ जाएँ? हमें 12 हजार रुपए हर महीने मिला करते थे. मैं घर में अकेला कमानेवाला था. अब हम लोग बड़ी मुश्किल में हैं."

राज्य सरकार भी स्वीकार करती है कि मामला पेचीदा है.

सामाजिक न्याय मंत्री शिवाजी राव मोगरे का कहना है, "गलती उन स्कूलों की है जिन्होंने नो ओब्जेक्शन सर्टिफिकेट के बिना इन शिक्षकों को नौकरियां दीं. अब इस में सरकार किया कर सकती है?"

नौकरी से निकाले गए कुछ शिक्षक और कर्मचारी अब अदालत गए हैं.

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