सख्ती से निपटेंगे, एयर इंडिया का पैकेज भी रोक सकते है:अजित सिंह

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Image caption अजित सिंह ने हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाया है

भारत के नागरिक विमानन मंत्री अजित सिंह ने कहा है कि सरकार हड़ताल पर गए एयर इंडिया पायलटों से सख्ती से निपटेंगी और यदि कामकाज न सुधरा तो आर्थिक पैकेज भी रोका जा सकता है.

दो दिन से खुद को बीमार बताकर एयर इंडिया के लगभग 300 पायलट हड़ताल पर हैं जिससे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं.

बीबीसी से बातचीत करते हुए अजित सिहं ने कहा, "जो पैसे सरकार ने एयर इंडिया के लिए दिए हैं, वो जनता के हैं. वैसे ही बजट घाटा काफी अधिक है जिसे कम करने की बात हो रही है. तो ऐसा नहीं होगा कि सरकार एयर इंडिया के कामकाज में बिना किसी सुधार हुए 30,000 करोड़ रुपए की मदद देना जारी रखे. अगर फायदा नहीं हुआ तो इसे रोक देंगे."

अजित सिहं ने हड़ताल के पहले दिन ही इस हड़ताल को गैरकानूनी बताया था.

क्यों परेशानी में है एयर इंडिया?

नागरिक विमानन मंत्री का कहना था कि पायलटों ने खुद को बीमार बताकर काम पर आने से इनकार कर दिया है, जिससे हड़ताल की स्थिति बन गई है. सरकार का कहना है कि पायलेटों नें हड़ताल के लिए किसी तरह का नोटिस नहीं दिया है, इसलिए ये हड़ताल गैरकानूनी है.

हड़ताल गैर-कानूनी, पायलट बर्खास्त

एयर इंडिया प्रबंधन ने हड़ताल के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को पायलटों के हड़ताल पर जाने पर रोक लगा दी और इसे अवैध करार दिया.

मंगलवार को एयर इंडिया प्रबंधन ने 10 पायलटों को बर्खास्त कर दिया था और इंडियन पाइलट्स गिल्ड की मान्यता रद्द कर दी है. गिल्ड के कार्यालय को सील कर दिया गया था.

बुधवार को एयर इंडिया ने सामूहिक रूप से चिकित्सा अवकाश पर जाने वाले 26 पायलटों को भी उनकी सेवाओं से बर्खास्त कर दिया.

एयर इंडिया से संबंध रखनेवाले पायलटों के एक समूह का मानना है कि कंपनी के पास जो नया ड्रीमलाइनर विमान आ रहा है उस पर ट्रेनिंग और उसे उड़ाने का पहला अधिकार उन्हीं का है.

उनका तर्क है कि ये विमान एयर इंडिया ने खरीदने के ऑडर दिए थे, तब जब एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस अलग-अलग कंपनियाँ थीं जिनका बाद में विलय हो गया.

सरकार का कहना है कि चूंकि अब कंपनी एक है, इसलिए जितने पायलटों को ट्रेनिंग दी जाएगी उसमें दोनों पुरानी विमान कंपनियों के पायलट होंगे.

'बातचीत जारी रखनी थी'

Image caption हड़ताल की वजह से काफी उड़ान सेवाएं रद्द हुई जिसने पैसेंजरों को परेशानी में डाल दिया है.

नागरिक विमानन मंत्री ने बीबीसी से कहा कि पायलटों को हड़ताल पर जाने से पहले 'कंपनी के हालात का ध्यान रखना चाहिए था, वो कंपनी में काफी अहम ओहदे पर हैं, लेकिन बड़े ओहदों के साथ बड़ी जिम्मेदारियो का भी निर्वाह करना पड़ता है.'

अजित सिंह ने कहा, "मैं उनकी मांगो के जायज या नाजायज होने पर किसी तरह की टिपण्णी नहीं कर रहा, सिर्फ ये कह रहा हूं कि उन्होंने जिस तरह का कदम उठाया है वो सही नहीं है. उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि कंपनी आज कर्मचारियों की तंख्वाह से लेकर, तेल कंपनियों और एयरपोर्ट ऑथिरिटी को पैसे इसलिए दे पा रहे हैं क्योंकि सरकार ने आर्थिक मदद देने को मंजूरी दी है. ये वक्त ये सोचने का नहीं है कि मुझे क्या मिल रहा है बल्कि इसका है कि कंपनी के हालात कैसे बेहतर बनाए जाएं."

जब बीबीसी ने उनसे सवाल किया कि क्या एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का विलय भी कहीं न कहीं कंपनी की दिक्कतों की वजह है अजित सिंह ने माना कि कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि विलय पूरी तरह कामयाब नही हो पाया क्योंकि दोनों कंपनियों के काम-काज के ढंग, तंख्वाहों और दूसरे मुद्दे एक दूसरे से बिल्कुल अलग थे.

लेकिन उन्होंने साफ किया "लेकिन अब विलय का काम काफी आगे जा चुका है इसलिए उसमे किसी बदलाव की गुंजाइश नहीं."

अजित सिंह ने एक सवाल के जवाब में इस बात से इंकार किया कि सरकार एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर हाल के दिनों में कोई मन बना सकती है.

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