अब लंदन में गुजराती शेक्सपियर

गुजराती शेक्सपिअर
Image caption इस गुजराती नाटक को लंदन में जारी शेक्सपिअर पर आयोजित एक उत्सव 'ग्लोब टू ग्लोब' में दिखाया जाएगा

हेली दर्द भरी आवाज़ में गुजराती भाषा में अपने प्रेमी की याद में गा रही हैं. उनके सुन्दर चेहरे पर उदासी छाई हुई है. प्रेमी की माँ नहीं चाहती कि हेली से उनके बेटे का कोई संबंध हो.

यह है मंज़र एक नाटक का जिस में मुंबई की एक गुजराती मॉडल मानसी पारिख हेली की भूमिका निभा रही हैं. यह नाटक शेक्सपियर के नाटक 'आल्ज़ वेल दैट एंड्स वेल' का गुजराती रूपांतर है. हेली यानी मानसी का इसमें सब से अहम् रोल है.

मानसी कहती हैं "यह कहानी मेरे किरदार के इर्द गिर्द घूमती है"

अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव

'सौ सारु जेनू छेवट सारु ' नामी इस नाटक को लंदन में जारी शेक्सपिअर पर आयोजित एक उत्सव 'ग्लोब टू ग्लोब' में दिखाया जाएगा. इस उत्सव में विश्व भर से 37 भाषाओँ में शेक्सपिअर के नाटकों के रूपांतर पेश किये जा रहे हैं. इनमें गुजराती 'सौ सारु जेनू छेवट सारु ' भी है जो शेक्सपियर के 'आल्ज़ वेल दैट एंड्स वेल' का रूपांतर हैं.

मानसी लंदन कभी नहीं गयीं और ग्लोब थियेटर भी नहीं जहाँ यह उत्सव 21 अप्रैल को शुरू हुआ और 9 जून को समाप्त होगा.उत्साहित मानसी कहती हैं, "मैंने ग्लोब थियेटर में आयोजित एक नाटक का फ़िल्मी रूप मुंबई में देखा है लेकिन ग्लोब में मैं भी एक दिन नाटक प्रस्तुत करुँगी यह सपने में भी नहीं सोचा था"

मुंबई के एक स्कूल के एक बड़े से हाल में नाटक का अभ्यास जोर शोर से जारी हैं. नाटक लंदन के ग्लोब थिअटर में 23 और 24 मई को पेश किया जाएगा

कालजयी प्रासंगिकता

शेक्सपियर ने 'आल्ज़ वेल दैट एंड्स वेल' को पांच सौ साल से पहले लिखा था , पर गुजरती भाषा में इसे ढ़ालने वाले मिहिर भूता कहते हैं "शेक्सपियर हर काल में और हर विश्व के हर देश और समाज हमेशा प्रासंगिक रहेगें."

भूता के अनुसार शेक्सपियर ने जिन विषयों पर अपने नाटक लिखे हैं उनकी अहमियत आज भी बरक़रार है.

भूता कहते हैं "मैं शेक्सपियर के विश्वव्यापी मुद्दे यानी प्यार और सच्चे प्रेम को गुजरात के माहौल में ढालने की कोशिश की है."

शेक्सपियर का भारतीयकरण

बॉलीवुड ने भी कुछ फ़िल्में शेक्सपियर के नाटकों को आधार बनाकर बनायी हैं. विशाल भारद्वाज की हिंदी फ़िल्म मकबूल शेक्सपियर के नाटक मैकबेथ पर आधारित थी. उनकी एक अन्य फ़िल्म ओंकारा शेक्सपियर के लिखे नाटक ओथेलो पर आधारित थी.

भारद्वाज की फिल्मों की ही तरह गुजराती नाटक 'सौ सारु जेनू छेवट सारु ' अपने देसी पुट लिए हुए है. शेक्सपियर के मूल नाटक से अलग इसमें इसे बॉलीवुड के अंदाज़ में कहानी को गानों में पिरोया गया है.

उदय मजुमदार इस नाटक के संगीतकार हैं वो कहते हैं "गाने इस नाटक की कहानी का अटूट हिस्सा हैं. यह कहानी को आगे बढ़ने का काम करते हैं"

कहानी जन्म लेती है गुजरात में और बर्मा में ख़त्म होती है. हेली अपने प्रेमी को आखिर में हासिल कर लेती है. इस नाटक से जुड़े सभी कलाकारों को आशा है कि इसे लंदन के उत्सव में लोग सराहेंगे.

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