बालाकृष्णन मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार

केजी बालाकृष्णन
Image caption सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से केजी बालाकृष्णन साल 2010 में सेवानिवृत हुए.

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन पर पद के कथित दुरुपयोग के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अदालत में एक जनहित याचिका के जरिए मांग की गई थी कि वो केजी बालाकृष्णन के मामले को राष्ट्रपति के पास भेजे जाने के लिए केन्द्र को निर्देश दे.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज करते हुए केन्द्र को निर्देश दिया कि वो किसी योग्य एजेंसी से पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन पर लगाए गए आरोपों की जांच कराए.

जज बीएस चौहान और जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर बालाकृष्णन के खिलाफ लगाए गए आरोपों में सत्यता है तो मंत्री परिषद की सलाह पर राष्ट्रपति खुद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के अंतरगत विचार किए जाने के लिए भेज सकती है.

याचिका

पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका एक नागरिक संगठन ने दायर की थी जिसकी मांग थी कि केजी बालाकृष्णन का मामला राष्ट्रपति के संज्ञान में लाया जाए और वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर स्थापित बालाकृष्णन के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

गैर सरकारी संस्था का आरोप था कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के पद पर रहते हुए उन्होंने और उनके रिश्तेदारों ने अपनी वाजिब कमाई से कही अधिक मात्रा में धन एकत्रित कर लिया.

जस्टिस बालाकृष्णन को साल 2001 में पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था. साल 2007 में वो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से केजी बालाकृष्णन साल 2010 में सेवानिवृत हुए. इसी के बाद उन्हें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बनाया गया.