एहसान जाफरी की गोलीबारी से भड़के थे लोग: एसआईटी रिपोर्ट

गुलबर्ग सोसाइटी इमेज कॉपीरइट Arko Datta
Image caption गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा में लगभग 70 लोग मारे गए थे (तस्वीर: आर्को दत्ता)

गुजरात में 2002 के दंगों में मारे गए कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी के बारे में सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित विशेष जाँच दल की रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने हिंसक भीड़ पर गोली चलाकर उसे 'भड़काया' था.

विशेष जाँच दल ने पिछले दिनों अपनी अंतिम रिपोर्ट में ये विवादास्पद बात कही है.

जाफरी सहित 69 लोग अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा में मारे गए थे. विशेष जाँच दल यानी एसआईटी का गठन सर्वोच्च न्यायालय ने किया था.

एसआईटी गुजरात दंगों के कई अहम मामलों की जाँच कर रही है.

रिपोर्ट में कहा गया है, "जाफरी ने भीड़ पर गोली चलाई जिससे भड़की भीड़ गुलबर्ग सोसाइटी में घुस गई और वहाँ आग लगा दी."

संवाददाताओं के अनुसार एसआईटी रिपोर्ट में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के 'क्रिया पर प्रतिक्रिया' वाले बयान की झलक मिलती है. मोदी के उस बयान की व्यापक स्तर पर आलोचना हुई थी.

'क्रिया पर प्रतिक्रिया'

मुख्यमंत्री ने 2002 में एक टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि कांग्रेस सांसद की ओर से हुई गोलीबारी एक 'क्रिया' थी और उसके 'प्रतिक्रिया' स्वरूप हिंसा हुई.

बाद में मोदी ने कहा था कि उनके बयान को पूरे संदर्भ से हटकर देखा गया था. एसआईटी की रिपोर्ट ये तो मानती है कि मोदी ने 'क्रिया पर प्रतिक्रिया' वाला बयान दिया था मगर साथ ही उन्हें हर तरह से दोषमुक्त मानती है.

रिपोर्ट के अनुसार, "इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से जाफरी की गोलीबारी को एक क्रिया और उसके बाद हुई हिंसा को प्रतिक्रिया कहा था. मगर साथ ही यहाँ ये भी स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए कि दिवंगत एहसान जाफरी ने भीड़ पर गोली चलाई थी और गोधरा के मामले पर मुसलमानों से बदला लेने निकली भीड़ ने उस पर प्रतिक्रियास्वरूप कार्रवाई की."

एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी का आरोप रहा है कि उनके पति ने मदद के लिए मोदी को फोन किया था मगर उनकी ओर से कोई मदद नहीं आई.

वहीं गुलबर्ग जनसंहार में बचे लोग कहते रहे हैं कि जाफरी ने सोसाइटी की ओर भीड़ को बढ़ते देख आत्मरक्षा में गोली चलाई थी.

संबंधित समाचार