माओवादियों ने किया बंद का आह्वान

 रविवार, 20 मई, 2012 को 15:57 IST तक के समाचार

माओवादियों ने दंडकारण्य क्षेत्र में एक जून से बंद का आह्वान किया है

छत्तीसगढ़ में माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन ग्रीन हंट के विरोध में सीपीआई (माओवादी) ने एक जून से एक हफ्ते दंडकारण्य बंद करने आह्वान किया है.

संगठन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम पर सरकार सेना को युद्ध का प्रशिक्षण दे रही है जिसके शिकार आदिवासी हो रहे हैं.

बीबीसी को भेजे गए इस बयान में सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वो निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए आदिवासियों की जमीनों और जंगल को हड़पना चाहती है.

वैसे सरकार की ओर से इस बात से इनकार किया जाता रहा है कि माओवादियों के ख़िलाफ़ वो कोई ऑपरेशन ग्रीन हंट चला रहे हैं.

विरोध सप्ताह

दंकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी की ओर से जारी इस बयान में कहा गया है कि तमाम निजी कंपनियाँ इन इलाकों में तेजी से घुसपैठ कर रही हैं और सरकार ने उनके सामने घुटने टेक रखे हैं.

संगठन का आरोप है कि सरकारी अफसर और नेता भी इस साजिश में शामिल हैं जबकि आम जनता इसका विरोध कर रही है.

संगठन के मुताबिक विरोध करने वाले लोगों और आदिवासियों का सरकार ऑपरेशन ग्रीन हंट के जरिए दमन करना चाहती है.

बयान में आरोप लगाया गया है कि गढ़चिरौली के धनोरा में, बस्तर के बीजापुर क्षेत्र में और बस्तर के ही केडवाल में हेलीकॉप्टर से हुए हमले इसी का हिस्सा हैं और इन हमलों में हजारों सशस्त्र बलों का इस्तेमाल किया गया.

"इस क्षेत्र में सरकार माओवादियों के खिलाफ सेना का इस्तेमाल कर रही है. हेलीकॉप्टर से हुए हमले इसी का हिस्सा हैं और इन हमलों में हजारों सशस्त्र बलों का इस्तेमाल किया गया."

गुड्सा उसेंडी, प्रवक्ता दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी

विज्ञप्ति के मुताबिक दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी ने सरकार की इस कार्रवाई के विरोध में आगामी 1 से 7 जून के बीच विरोध सप्ताह मनाने का फैसला किया है.

इनकी माँग है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट तत्काल बंद किया जाए और बस्तर इलाके में सेना का कथित प्रशिक्षण बंद किया जाए.

विरोध प्रदर्शन के बाद सात जून को 24 घंटे के लिए दंडकारण्य बंद का भी आह्वान किया गया है.

दंडकारण्य वही इलाका है जहां माओवादियों ने पिछले दिनों सुकमा जिले के कलेक्टर का अपहरण किया था.

इस इलाके में माओवादियों ने कई बड़ी घटनाओं को भी अंजाम दिया है, जिसमें कुछ समय पहले सीआरपीएफ के 75 जवानों की हत्या भी शामिल है.

दंडकारण्य क्षेत्र के बारे में कहा जाता है कि ये वो इलाका है जिसके बड़े हिस्से में आज भी पुलिस और प्रशासन के लोग नहीं पहुंच पाते हैं.

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