काईरी की नागरिकता पर खींचतान जारी

काईरी
Image caption जब काईरी 8 वर्ष की ही थीं तो उनकी मां अर्लीन शेपर्ड का देहांत हो गया

अमरीका में रह रही भारतीय मूल की महिला काईरी शेपर्ड जिन्हें बचपन में एक अमरीकी महिला ने गोद ले लिया था अब उनको अमरीका से वापस भारत भेजे जाने के मामले में भारत सरकार हरकत में आ गई है.

वॉशिंग्टन स्थित भारतीय दूतावास ने अब अमरीकी सरकार से इस मामले में पूरी जानकारी मांगी है.

भारतीय दूतावास द्वारा एक बयान जारी कर कहा गया है कि काईरी शेपर्ड के साथ बेहद स्नेह और नर्मी के साथ मानवीय आधार पर सलूक किया जाना चाहिए.

भारतीय दूतावास के बयान में कहा गया कि, “काईरी शेपर्ड बहुत छोटी थीं जब वह भारत से अमरीका लाई गईं इसलिए उन्हें कोई और घर भी याद नहीं. काईरी के मामले में बेहद संवेदना और स्नेह के साथ मानवीयता और मानवाधिकारों के मानदंडो का भी ख्याल रखा जाना चाहिए.”

भारत में जन्मी काईरी को कोलकाता के एक अनाथालय से 1982 में सिर्फ़ तीन महीने की उम्र में अर्लीन शेपर्ड नामक महिला गोद लेकर अमरीका ले आई थीं.

मुश्किल दौर

जब काईरी 8 वर्ष की ही थीं तो उनकी मां अर्लीन शेपर्ड का देहांत हो गया. और फिर शुरू हुआ काईरी की मुश्किलों का दौर.

अमरीका के यूटाह राज्य में रहने वाली काईरी को अमरीकी नागरिकता दिए जाने संबंधित कागजात समय पर नहीं भरे गए और वह सिर्फ़ ग्रीन कार्ड के बल पर अमरीका में रहती रहीं.

इस बीच उनको नशे की लत लग गई. और इसी के दौरान उनको बैंक के एक चेक के संबंध में कथित रूप से धोखाघड़ी करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया.

अमरीकी अप्रवासन विभाग ने बयान जारी कर कहा है कि काईरी को दो आरोपों में मुजरिम करार दिया जा चुका है.

अमरीकी अप्रवासन विभाग के इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफ़ोर्समेंट या आईस ने बयान में कहा कि,“काईरी शेपर्ड के आपराधिक इतिहास में 2004 में यूटाह राज्य में धोखाधड़ी करने औऱ धोखाधड़ी की कोशिश करने के दो मामलों में अपराध साबित हो चुके हैं. और धोखाधड़ी करने का अपराध बहुत संगीन है.”

'आपराधिक' इतिहास

अमरीकी कानून के तहत इस तरह आपराधिक इतिहास वाले गैर-अमरीकी लोगों को उनके देश वापस भेज दिया जाता है.

काईरी अब तीस साल की हो चुकी हैं और उनको मल्टिपल स्कलरोसिस की बीमारी भी है जिससे उनके हाथों में तकलीफ़ रहती है.

काईरी अमरीका से भारत भेजे जाने का यह कहकर विरोध कर रही हैं कि वह भारत में किसी को नहीं जानतीं और सारा जीवन उन्होंने अमरीका में ही बिताया है.

उनकी मांग है कि उन्हे अमरीका में ही रहने दिया जाए.

इस मामले में काईरी ने एक अदालत से हस्तक्षेप करने की भ गुहार लगाई लेकिन उनकी अपील खारिज की गई है.

अब उनकी मदद के लिए अमरीका में कई वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में मामला ले जाने समेत अन्य रास्तों पर भी गौर करना शुरू किया है.

उनके एक वकील एलन स्मिथ ने बीबीसी को बताया कि हर मुमकिन रास्ते पर विचार कर रहे है जिससे काईरी को अमरीका से बाहर भेजे जाने को टाला जा सके.

काईरी की मदद

एलन स्मिथ कहते हैं, “हम लोग अमरीकी अप्रवासन कानूनों के तहत काईरी की मदद करने के हर मुमकिन पहलू पर विचार कर रहे हैं. इसके अलावा भारत में भी इस बारे में कुछ लोग हमारी मदद कर रहे हैं और रास्ते ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं.”

काईरी के वकील का कहना है कि काईरी अभी अमरीकी सरकार की हिरासत में नहीं हैं और वह एक गुप्त स्थान पर रह रही हैं. सिर्फ़ उनके वकीलों औऱ परिवार के कुछ लोगों से ही उनका संपर्क है.

उनके वकील काईरी के लिए मदद की भाव्नात्मक अपील करते हुए कहते हैं, “मैं तो बस यही सोचता हूं कि अगर यह मेरी बच्ची होती तो मुझे कैसा महसूस होता. अगर मैं अप्रवासन अधिकारी होता या दूतावास में अधिकारी होता तो मैं अपनी बेटी के लिए क्या कुछ करता. आप सोचिए कि काईरी तो अपने जीवन में दो बार यतीम हो चुकी है. इसलिए हम सबको काईरी की मदद करनी चाहिए.”

इस बीच अमरीकी अप्रवासन विभाग ने कहा है कि काईरी को अमरीका से भारत भेजे जाने के लिए निर्देश मौजूद हैं, और उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ जैसे ही हासिल हो जाएंगे तो काईरी को भारत वापस भेज दिया जाएगा.