एक अनूठे अभियान पर है यह डाक्टर

इमेज कॉपीरइट b

विभिन्न पेशों से जुड़े पेचीदे सवालों का जवाब आप तक पहुंचाने के लिए हर शनिवार बीबीसी हिंदी सेवा आपकी मुलाकात ऐसे पेशेवर व्यक्तियों से करवाती है जिनका काम अपने आप में अनूठा हो.

यूँ तो डॉकटर वीरेन्द्र सिंह राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान जयपुर सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में अस्थमा, श्वास और एलर्जी विभाग के प्रमुख है.

मगर जिस भाव से डॉकटर वीरेन्द्र सिंह अपने काम को अंजाम देते है, वो उन्हें एक अलग पहचान देती है. वो गाँधी से प्रभावित है और लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करते रहते है.

डॉ वीरेन्द्र सिंह से बात की बीबीसी संवाददाता नारायण बारेठ ने

आप हॉस्पिटल और घर पर मरीजो का उपचार करते है, सुना है आप नशा उन्मूलन के लिए अभियान भी चलते है ?

हाँ, मैं शिक्षण संस्थानों में जाता हूँ, बच्चो को तम्बाकू सेवन के नुक्सान बताता हूँ.

मैं एक स्लाइड शो के जरिये उन्हें बताता हूँ कि धुंआ शरीर में जाकर कितना नुकसान करता है, कैसे ये धुआं शरीर में तबाही मचाता है.

एक बार बच्चे इसे देख लेते है तो फिर वो कभी तम्बाकू और धूम्रपान की तरफ मुँह नहीं करते.

आपको ऐसा करने का भाव कैसे आया ?

दरअसल कुछ साल पहले किसी परिचित के बुलावे पर मैं 'गाँधी कथा ' सुनने चला गया. वो मेरी जिंदगी का निर्णायक मोड़ साबित हुआ.मैं और मेरी पत्नी गाँधी के विचारो से बेहद प्रभावित हुए.

तब से मैं स्कूल कॉलेजों में जा कर बच्चो को नशे के कुप्रभाव और गाँधी के विचारो से अवगत करता हूँ. मैं ये भी बताता हूँ कि गाँधी पढाई में कमजोर थे, बहुत डरपोक थे, चोरी छिपे धूमपान भी किया. बाद में अपने सत्य के विचारो से बहुत निडर बने, सात्विक मर्यादित जीवन जीया.

फिर मैं बच्चो से कहता हूँ कि आप भी उसी तरह अच्छे इंसान बन सकते है. मैंने देखा बच्चे बहुत जल्दी अच्छी बात ग्रहण करते है. ये वो तबका है जो अभी किसी भी व्यसन से परे है. क्योंकि नशा शुरू नहीं करना आसान है, छोड़ना मुश्किल होता है. तो बच्चो में शुरू से ही ये भाव पैदा कर देना चाहिए कि नशा बड़ी बुराई है.

ऐसा क्या था जिसने आपमें धुम्रपान जनित बिमारियो से पीड़ित लोगो की ज्यादा सेवा करने का भाव भरा ?

जब लोगो को देखा कि धूम्रपान और तम्बाकू सेवन से उनके फेफड़े बहुत ख़राब हो गये,वो चंद कदम चलने में भी दिक्कत महसूस करते है. समय पर नहीं चेतने से उनकी हालत बुरी हो गई. तभी हमने इस दिशा में काम शुरू किया, अस्थमा केयर सोसाइटी बनाई.

तब से ही हम इसके लिए अभियान चला रहे है. साथ ही घर पर जो मरीज आते है उनमे विधवा, कैंसर पीड़ित, उम्रदराज और गरीब होते है उनसे फीस नहीं लेता.

आपने डॉक्टर का पेशा चुना तो कुछ सपने भी इस पेशे के लिए बुने होंगे ,क्या वो पूरे हो पाए ?

डॉक्टर बनने से पहले मेरा सपना था कुछ अनुसंधान और अविष्कार करने का. हाँ, इस पेशे में आने के बाद श्वास रोगों में काम आने वाले उपकरण इजाद किये है.

संबंधित समाचार