नियंत्रण रेखा के पास उमर के मंत्रिमंडल की बैठक

उमर अब्दुल्ला
Image caption उमर के विरोधियों ने एक गांव में मंत्रिमंडल की बैठक करने पर उनकी आलोचना की है.

भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर के युवा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जल्द ही नियंत्रण रेखा के पास स्थित एक दूर-दराज के गांव तुंगधर में अपने मंत्रिमंडल की विशेष बैठक करेंगे. यही नियंत्रण रेखा कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच बांटती है.

सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेस के अनुसार, “ये गरीब और भुला दिए गए वर्गों के द्वार तक सरकार को ले जाने की कोशिश है.”

वहीं अब्दुल्ला के विरोधियों ने उनकी इस कोशिश को 'हास्यास्पद' बताते हुए इसे 'महंगे पिकनिक' का नाम दिया है.

आलोचकों का कहना है कि ऐसे इलाके में मंत्रिमंडल की बैठक करना 'दिखावे' से ज्यादा कुछ नहीं है जहां बिजली, स्वास्थ्य सेवा और संचार की बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं.

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

विपक्षी पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है, “हो सकता है कि वो (उमर अब्दुल्ला) अपनी नई एसयूवी गाड़ी की टेस्ट ड्राइव के लिए वहां जा रहे हो क्योंकि उनके पास बहुत महंगी महंगी गाड़ियां हैं. सरकार को 100 किमोमीटर के दायरे में सुरक्षा तैनात करनी होगी और मुख्यमंत्री के साथ बड़ी सरकारी अमला भी होगा. यह हास्यास्पद है और एक महंगे पिकनिक से ज्यादा कुछ नहीं है.”

वहीं सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस के नवनियुक्त प्रवक्ता तनवीर सादिक का कहना है, “लोग सरकारी मदद मांगने के लिए सरकार के दरवाजे पर आया करते थे लेकिनि उमर साहिब सरकार के साथ जरूरतमंदों के दरवाजे तक जा रहे हैं.”

विश्लेषक नियंत्रण रेखा के करीब कैबिनेट की बैठक करने के पीछे दो वजहों को मान रहे हैं. एक कॉलेज प्रोफेसर का कहना है, “पहली बात तो ये कि उमर नई दिल्ली को दिखाना चाहते हैं कि सीमावर्ती इलाके भी उग्रवाद से मुक्त हैं, इसलिए कड़े सैन्य कानूनों को हटाए जाने की उनकी मांग को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए. दूसरी बात वार्ताकारों की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मुख्यमंत्री का दूर दराज के इलाकों में रह रहे लोगों के कोई संपर्क नहीं है.”

विकास की राह ताकते लोग

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Image caption अत्यंत सुरक्षा वाली नियंत्रण रेखा.

तुंगधर श्रीनगर के उत्तर में 130 किलोमीटर दूर एक अलग थलग सा कस्बा है और ये 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा के करीब पड़ता है.

एक स्थानीय व्यक्ति आदिल ने लोलाब से फोन पर बीबीसी को बताया, “हमारे यहां सड़क है जो नियंत्रण रेखा से पहले आखिरी गांव तीतवॉल तक जाती है. पिछले 40 साल में किसी सरकार ने इसे विकसित करने के बारे में नहीं सोचा. हम किशनगंगा नदी के पार पाकिस्तान वाली तरफ मोबाइल फोन के टावर और अच्छी सड़कें देखते हैं, लेकिन यहां टेलीफोन पर बातचीत प्रतिबंधित है और सड़कों की हालत बेहद खराब है.”

आमतौर पर मंत्रिमंडल की बैठकों में अधिकारियों की तैनाती और तबादलों पर फैसले होते हैं या विकास परियोजनाओं को मंजूर किया जाता है.

एक स्थानीय अखबार के लिए लिखने वाले जावेद नकीब कहते है कि अगर सरकार ने तुंगधर के लिए विकास की कोई बड़ी परियोजना बनाई है तो वहां मंत्रिमंडल की बैठक करना ठीक है. लेकिन अगर वे वेतन बढ़ाए जाने को लेकर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के मुद्दे पर बात करने के लिए इतनी दूर तुंगधर जा रहे हैं तो फिर ये सिर्फ प्रचार का एक सस्ता तरीका होगा.

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