चार दिन में तीन बाघों की मौत

 मंगलवार, 29 मई, 2012 को 18:54 IST तक के समाचार
बाघ

तीन बाघों की मौत ने वनविभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है.

पीलीभीत के जंगलों में एक के बाद एक तीन बाघों के शव मिले हैं.

पहले दो बाघों के शव मिलने के बाद अधिकारी इसे स्वाभाविक मौत का मामला बता रहे थे लेकिन तीसरा शव मिलने के बाद वे कह रहे हैं कि ये टेरिटोरियल फ़ाइट यानी क्षेत्रीय अधिकार की लड़ाई है.

वन विभाग इस मामले की जाँच कर रहा है.

जबकि वन्यजीव प्रेमी परवेज़ हनीफ़ (संरक्षक ओआईपीए व पीएसएस) का कहना है कि यह बाघ को ज़हर देकर मारने का मामला है.

कैसे हुई मौत

गत 24 मई को जब पहले बाघ का शव हरिपुर रेंज के कंपार्टमेंट नंबर 2 में खिरिया नाले में तैरता मिला तो वन अधिकारियों ने दावा किया कि उसकी स्वाभाविक मौत हुई है.

पोस्टमार्टम के बाद इस बाघ की उम्र 10-12 वर्ष बताई गई.

वनाधिकारियों का तर्क था कि बाघ के नाखून, दांत, बाल सुरक्षित हैं तथा शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं तो यह स्वाभाविक मौत है.

"यहां वन विभाग की ओर से गश्त की कमी व वनकर्मियों की मदद से लकड़ी बीनने वाले व जंगल में अपने जानवर चरवाने वाले जब बाघ के शिकार हो जाते हैं तो वे अपने जानमाल की रक्षा करने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं ऐसा लगता है कि इसका परिणाम इस बार दो बाघों की मौत से सामने आ गया है"

परवेज़ हनीफ़, वन्य प्रेमी

फिर 25 मई को इसी स्थान से लगभग 300 मीटर की दूरी पर दूसरे बाघ का शव मिल गया.

इस बाघ के भी शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं थे तथा इसके मल में मांस का टुकड़ा भी मिला.

जबकि तीसरे बाघ के प्रारंभिक परीक्षण के दौरान पाया कि उसका एक पंजा व रीड की हड्डी टूटी हुई है और मल द्वार के पास एक घहरा घाव है.

इस बार वनविभाग इसे टेरीटोरियल फाइट बता रहे हैं.

भारत सरकार व विश्व बैंक बाघ संरक्षण पर करोडों रुपया प्रतिवर्ष खर्च करता है लेकिन देश में बाघों की संख्या लगातार कम होती जा रही है.

वन्यजीव प्रेमी परवेज़ हनीफ़ कह रहे हैं यह बाघ को ज़हर देकर मारने का मामला है.

उनका कहना है कि जंगल के अंदर जब इंसान की दखलंदाजी ज्यादा बढ़ जाती है तो इसका परिणाम वन्यजीवों को ही भुगतना पडता है.

उनका कहना है, "यहां वन विभाग की ओर से गश्त की कमी व वनकर्मियों की मदद से लकड़ी बीनने वाले व जंगल में अपने जानवर चरवाने वाले जब बाघ के शिकार हो जाते हैं तो वे अपने जानमाल की रक्षा करने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं ऐसा लगता है कि इसका परिणाम इस बार दो बाघों की मौत से सामने आ गया है."

डीएफओ वीके सिंह ने बताया कि बाघों की मौत के बारे में जंगल के आसपास रहने वाले जानवर मालिकों से पूछताछ की जा रही है.

उन्होंने बताया कि इस मामले में प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए हरिपुर रेंज के पूरे स्टाफ को हटा दिया गया है.

उन्होने यह भी बताया कि 28 मई को बाघों के शव से करीब 200 मीटर दूर एक भैंस के बछड़े का आधा खाया शव मिला है जिसके मांस का टुकडा जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.