देहरादून मुठभेड़ मामले में 11 पुलिसवालों का आत्मसमर्पण

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Image caption भारतीय पुलिस अकसर फर्जी मुठभेड़ के आरोपों में घिरती रही है.

देहरादून में 2009 में हुए एक कथित फर्जी मुठभेड़ के अभियुक्त 18 पुलिसकर्मियों में से 11 ने मंगलवार को दिल्ली में सीबीआई की विशेष अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया जिन्हें बाद में जेल भेज दिया गया.

इस मुठभेड़ में रणबीर सिंह नाम के एक एमबीए छात्र की मौत हो गई थी.

इसी साल मई में अभियुक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था. इनमें से 11 पुलिसकर्मियों ने मंगलवार को दिल्ली में सीबीआई की विशेष अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

अदालत ने कहा, “उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है.”

कैदियों से 'पुलिसवालों को डर'

पुलिस के अनुसार गाजियाबाद के रहने वाले 22 वर्षीय रणबीर सिंह को 3 जुलाई 2009 को देहरादून में मोहिनी रोड से पकड़ा गया जहां वो और उनके साथ कथित तौर पर कोई अपराध करने वाले थे. उन्हें कथित फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया.

आत्मसमर्पण करने वालों में तत्कालीन कॉन्स्टेबल सतबीर सिंह, सुनील सैनी, चंद्रपाल, सौरभ नौटियाल, नगेंद्र नाथ, विकास चंद्र बलूनी, संजय रावत, मोहन सिंह राणा, इंदर भान सिंह और मनोज कुमार और सिटी कंट्रोल रूम के संचालक जसपाल सिंह गौसेन शामिल हैं.

इस मामले में सीबीआई ने कुल 18 लोगों के खिलाफ़ आरोप-पत्र दाखिल किए हैं.

उन 18 अभियुक्तों में से सात पहले से गिरफ्तार हैं और दिल्ली के तिलाड़ जेल में बंद हैं जबकि अब तक फरार चल रहे 11 अभियुक्तों ने मंगलवार को आत्मसमर्पण कर दिया.

तिहाड़ जेल में बंद अभियुक्तों में उस वक्त के इंस्पेक्टर संतोष जायसवाल, सब-इंस्पेक्टर गोपाल दत्त भट्ट, राजेश बिष्ट, नीरज कुमार, नितिन चौहान और चंद्र मोहन व कॉन्स्टेबल अजीत सिंह शामिल हैं.

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार जुलाई को निर्धारित की है.

आत्मसमर्पण करने वाले 11 अभियुक्तों ने अदालत से अपील की थी कि उन्हें जेल में एक साथ रखा जाए क्योंकि वे पुलिसकर्मी हैं और उन्हें अन्य कैदियों से खतरा हो सकता है.

अदालत ने उनकी अपील को स्वीकार कर लिया और उन्हें एक साथ रखने का निर्देश दिया.

फर्जी मुठभेड़ के आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर के पिता रविंद्र सिंह की याचिका पर इस मामले को दिल्ली स्थानांतरित किया था.

रणबीर के पिता का कहना है कि उनका बेटा नौकरी की तलाश में देहरादून गया था लेकिन पुलिस ने तीन जुलाई 2009 को उसे लूटपाट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था.

उनका कहना है कि उसी दिन रणबीर के शरीर में 29 गोलियां उतार दी गईं और इस मामले को मुठभेड़ के तौर पर पेश किया गया.

सभी 18 पुलिसकर्मियों पर हत्या, अपहरण, आपराधिक षड़यंत्र, सबूत मिटाने और गलत रिकॉर्ड तैयार करने के आरोप लगे हैं.

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