कतील हत्याकांड:मुंबई हाईकोर्ट ले संज्ञान

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Image caption कतील को जेल की कोठरी में मृत पाया गया था.

जामा मस्जिद बम धमाके और बैंगलोर के चिन्नास्वामी स्टेडियम धमाके में अभियुक्त कतील सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत में हत्या की मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने घोर निंदा की है.

मानवाधिकार कार्यकर्ता मनीषा सेठी का कहना है कि हत्या के वक़्त कतील न्यायिक हिरासत में थे, यानी उनकी सुरक्षा के ज़िम्मेदारी अदालत की थी ऐसे में जेल में उनकी हत्या हो जाना असामान्य है.

मनीषा सेठी जामिया टीचर्स सोलिडेरिटी एसोसिएशन से जुड़ी हुई हैं. उनके साथ कई और सामाजिक संगठन कर कार्यकर्ता जुड़े हुए हैं.

सभी संगठनों ने मांग की है कि मुंबई हाई कोर्ट अपने आप कतील की हिरासत में हत्या का संज्ञान ले और और कार्रवाई करे.

कतील सिद्दीकी पुणे के एक मशहूर गणेश मंदिर में बम लगाने की साजिश का हिस्सा होने का आरोप था. साथ ही कतील के ऊपर दिल्ली की जामा मस्जिद और बैंगलोर के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए बम धमाकों में भी शामिल होने का आरोप था.

मनीषा सेठी, शबनम हाश्मी, हर्ष डोभाल सहित सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि राज्य सरकार अपने ख़र्च से कतील के शव को बिहार उनके घर पहुंचाए ताकि उसका अंतिम संस्कार किया जा सके.

इन सभी लोगों ने कतील की पत्नी के लिए मुवावज़े की मांग भी की है.

पृष्टभूमि

शुक्रवार को पुणे की कड़ी सुरक्षा वाली येरवडा केंद्रीय जेल में कतील की की कथित तौर पर कैदियों ने गला घोंट कर हत्या कर दी थी. मृतक कतील सिद्दिकी तीन चरमपंथी हमलों से जुड़े मामलों में अभियुक्त थे.

महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में जेल अधीक्षक एसवी खटवकर को निलंबित कर दिया और सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं.

शुरुआती जांच में इस हत्या के लिए दो अन्य कैदियों शरद मोहाल और आलोक भालेराव को जिम्मेदार बताया जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है. बताया जाता है कि हत्या के पहले उनकी कतील से किसी बात पर बहसबाजी हुई थी.

मोहोल और भालेराव, दोनों ही मकोका के तहत आरोप झेल रहे हैं और इस साल फरवरी से जेल में बंद हैं.

कतील को पिछले साल दिल्ली से गिरफ्तार किया था. आरोप है कि 13 फरवरी 2010 को जिस दिन पुणे की जर्मन बैकरी पर हुए धमाके में 17 लोगों की जानें गईं, उसी दिन कतील ने पुणे के मंदिर में बम रखा था. लेकिन ये कोशिश नाकाम रही.

एटीएस ने मंदिर पर हमले की कोशिश से जुड़े मामले में अभी आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है.

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