राजद्रोह में सामाजिक कार्यकर्ता को उम्र कैद

सीमा आजाद
Image caption सीमा और पति विश्वविजय आजाद फैसले के खिलाफ ऊंची अदालत जाने की बात कह रहे हैं.

इलाहाबाद की एक अदालत ने राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता सीमा आजाद और उनके पति विश्वविजय आजाद को राजद्रोह के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

दोनों के ऊपर माओवादी गतिविधियां संचालित करने और माओवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के सिलसिले में राजद्रोह का मामला चल रहा था.

कभी इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र राजनीत में सक्रिय रहीं सीमा और उनके पति को छह फरवरी 2010 को उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते यानी एटीएस ने स्थानीय रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था.

अभियोजन पक्ष ने सीमा के खिलाफ 16 गवाह पेश किए और अदालत में आरोप लगाया था कि सीमा और उनके पति के पास प्रतिबंधित माओवादी साहित्य मिले थे, दोनों माओवादी कार्यकर्ता हैं और माओवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार का काम करते हैं.

साजिश के शिकार

छात्र राजनीति में सक्रिय रहीं सीमा ने 'इंकलाबी छात्र मोर्चा' नाम का छात्र संगठन बनाया था और बाद में अपने पति विश्वविजय आजाद के साथ मिलकर उन्होंने 'दस्तक' नाम की पत्रिका का संपादन भी किया.

इलाहाबाद से स्थानीय पत्रकार ऋषि मालवीय का कहना है कि सजा सुनाए जाने के बाद सीमा और विश्वविजय आजाद ने मीडिया से कहा की उन्हें सरकार और एटीएस ने साजिश के तहत फंसाया है वो अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे.

उनका कहना था कि जो भी लोगों की समस्या और दुर्दशा के लिए आवाज उठाता है सरकार उसके खिलाफ इसी तरह से कार्यवाही कर रही है.

सीमा और उनके पति मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज से सक्रिय रूप से जुड़े हैं.

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