आईआईटी: गरीब विरोधी है सिब्बल का प्रस्ताव?

आनंद कुमार सुपर 30
Image caption आनंद कुमार सुपर 30 के सफल बच्चों के साथ.

आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल के द्वारा प्रस्तावित बदलावों का विरोध बढ़ता जा रहा है.

पटना में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा के लिए गरीब बच्चों को मुफ्त तैयारी कराने वाले सुपर 30 के संचालक आनंद कुमार के अनुसार 12वीं की परीक्षा में प्राप्त अंकों को आईआईटी जेईई में महत्त्व दिए जाने का प्रस्ताव “गरीब विरोधी” है.

आनंद कुमार के अनुसार इस कदम की वजह से केवल अति संभ्रांत वर्ग के बच्चे ही आईआईटी की परीक्षा में पास होंगे.

प्रस्ताव

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार या प्रयास करेगी कि देश के सभी शिक्षा बोर्डों के अंकों और प्रवेश परीक्षा के अंकों को न्यायपूर्ण तरीके से आंकने के लिए कोई एक पद्धति खोजी जायेगी.

ऐसा प्रस्ताव किया गया है कि आईआईटी में दाखिले के लिए 40 फ़ीसदी महत्त्व 12 वीं कक्षा के अंकों को दिया जाएगा उसके 30-30 फ़ीसदी महत्त्व जेईई की मेन और एडवांस परीक्षाओं में आये अंकों को दिया जायेगा.

आनंद कुमार कहते हैं “मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश बोर्ड के बच्चों को बहुत ही कम अंक मिलते हैं जबकि गोवा और महाराष्ट्र जैसे बोर्डों के बच्चों को सौ फ़ीसदी तक अंक आते हैं.”

‘असमानता बढ़ेगी’

आनंद कुमार बताते हैं कि बिहार बोर्ड की परीक्षा में 60 फ़ीसदी अंक लाने वाले बच्चे उनके यहाँ पढ़ कर आईआईटी में ना केवल दाखिल हुए हैं बल्कि दुनिया भर के सर्वोत्तम विश्विद्यालयों में पढ़ा भी रहे हैं. वो कहते हैं " एक रिक्शे वाले का, सब्जी वाले का बच्चा जो कि ऐसे स्कूल से आता है जहाँ ना शिक्षक है, ना बैठने को कमरा और पढ़ने को किताब वो बच्चा तो कभी आईआईटी के अंदर जा ही नहीं पाएगा."

आईआईटी दिल्ली से हाल ही में पढ़ कर निकले और अब बैंगलोर में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम कर रहे पीयूष वर्मा भी आनंद कुमार की बात का समर्थन करते हैं.

पीयूष वर्मा कहते “ आईआईटी भारत के सर्वश्रेष्ठ संस्थान इसलिए हैं क्योंकि वहां की प्रवेश परीक्षा में 12 वीं के अंकों का महत्त्व नहीं है. अगर यह हुआ तो बचपन में ही यह तय हो जाएगा कि कौन आई आई टी जाएगा और कौन नहीं.”

‘असमान स्तर’

वर्मा उदहारण देते हुए कहते हैं “आईआईटी में मेरे बिहार और राजस्थान से दो अभिन्न मित्र हैं. बिहार के मित्र को 87 फ़ीसदी अंक आये थे और वो राज्य में पहले 10 छात्रों में था. अगर वो सीबीएससी में पढ़ता तो उसके कम से कम 97 फ़ीसदी अंक आते. बिहार जैसे राज्य में जहाँ नक़ल बहुत होती हैं वहाँ हमेशा संभावना रहती हैं कि एक अच्छे छात्र के कम और और एक नकलची छात्र के बहुत अच्छे अंक आ जायें.”

वर्मा के अनुसार उनके राजस्थान से आये मित्र बताते हैं कि राजस्थान बोर्ड में ज़िले-ज़िले के बीच में छात्रों के बीच असामनता है. वर्मा कहते हैं कि बोर्ड के अंकों को उसी दिन महत्त्व दिया जाना चाहिए जब पूरे भारत में हर स्कूल की शिक्षा का स्तर एक हो.

‘कोचिंग को बढ़ावा’

पटना में सुपर 30 के संचालक आनंद कुमार कहते हैं कि कपिल सिब्बल यह सब प्रायवेट कोचिंग सेंटरों के प्रभाव को मिटाने के लिए कर रहे हैं. आनंद कुमार के अनुसार होगा इसका उलट “लिख लीजिये कोचिंग बढ़ेगी. जो छात्र पहले केवल आईआईटी की कोचिंग ले रहा था. अब 12 वीं की कक्षा में अधिक नंबर लाने के लिए गलाकाट प्रतियोगिता के चलते अलग कोचिंग लेगा. वस्तुनिष्ठ और विषयनिष्ठ परीक्षाओं के लिए अलग अलग कोचिंग यानि तिगुनी कोचिंग.”

कुल मिला कर कपिल सिब्बल के प्रस्तावों के पक्ष और विपक्ष में तर्कों की जंग बढ़ती जा रही है लेकिन शायद यह कोई बुरी बात नहीं है क्योंकि दावं पर भारत के सबसे बेहतर कॉलेजों और लाखों प्रतिभावान छात्रों का भविष्य लगा हुआ है.

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