आंध्र के उपचुनाव में झड़पें, 70 फ़ीसदी मतदान

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Image caption जगन मोहन रेड्डी आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ़्तार हैं और वे चुनाव प्रचार भी नहीं कर सके हैं

आंध्र प्रदेश में उपचुनाव के दौरान हिंसा, पथराव और झड़पों की घटनाएँ हुई हैं जिनमें कम से कम एक दर्जन लोग घायल हुए हैं.

पुलिस के अनुसार सत्तारूढ़ कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच कड़प्पा और नेल्लोर में झड़पें हुई हैं और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.

वैसे राज्य की एक लोकसभा सीट और 18 विधानसभा सीटों पर 70 प्रतिशत से अधिक लोगों मे मतदान किया है.

मतदान केंद्रों पर शाम पाँच बजे के बाद भी लोग लाइनों में खड़े थे. मुख्य चुनाव आयुक्त भँवर लाल ने कहा है कि जो लोग पाँच बजे तक मतदान केंद्र तक पहुँच गए थे उन्हें मतदान करने की अनुमति दी गई.

पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन मोहन रेड्डी के लिए और उनकी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के लिए इन चुनावों को अहम माना जा रहा है.

कहा जा रहा है कि इन चुनावों के परिणामों से राज्य की कांग्रेस सरकार का भविष्य भी जुड़ा हुआ है.

झड़पें और पथराव

झड़प की एक घटना नेल्लोर जिले के एक गाँव में हुई जहाँ आईएसआर कांग्रेस और कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए.

वे एक दूसरे पर धांधली का आरोप लगा रहे थे. दोनों ओर से हुए पथराव में नौ लोगों के घायल होने की ख़बरें हैं.

वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी के गृह जिले कड़प्पा के दो विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में भी हिंसा की घटनाएँ हुईं.

रेलवे कोदुर में पुलिस ने वाईएसआर कांग्रेस के दो नेताओं को मतदाताओं में पैसे बाँटने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

तिरुपति और परकाल विधानसभा क्षेत्रों में भी वाईएसआर कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झडपें हुईं हैं.

ओंगोले में एक मतदान केंद्र पर दो चुनावी अधिकारियों को धांधलियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

इसी क्षेत्र में दिल का दौरा पड़ने से एक महिला की मृत्यु हो गई. जबकि अल्लागाड्डा क्षेत्र में दिल का दौरा पड़ने से एक पुलिसकर्मी की मृत्यु हो गई.

अहम चुनाव

प्रदेश के 12 जिलों में चुनाव के लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे और 50 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था जिनमें अर्धसैनिक बलों की 140 कंपनियाँ भी शामिल हैं.

Image caption आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण रेड्डी के लिए भी ये चुनाव महत्वपूर्ण हैं

कुल 5400 से ज्यादा मतदान केन्द्रों में से 95 प्रतिशत पर वीडियो कैमरे लगे हुए थे जिससे चुनाव अधिकारी मतदान की स्थिति पर नज़र रखे हुए थे.

इन उपचुनावों को लेकर काफी तनाव था क्योंकि इस के परिणाम सत्तारुढ़ कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस के भाग्य का फैसला कर सकते हैं.

नेल्लोर की लोकसभा सीट और 18 में से 17 विधानसभा सीटें अब तक वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी के समर्थकों के पास थीं.

ये लोग पहले कांग्रेस की टिकट पर चुने गए लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी और जगन के साथ मिल गए थे.

उप चुनाव इसलिए हो रहा हैं क्योंकि या तो इन सदस्यों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था या फिर उन्होंने त्यागपत्र दे दिया था.

जगन और उनके समर्थक चाहते थे कि पिता की मौत से खाली हुई जगह पर पुत्र को मुख्यमंत्री बनाया जाए लेकिन कांग्रेस ने उनकी इस मांग को रद्द कर दिया था.

माना जा रहा है कि अगर वाईएसआर कांग्रेस इनमें से अधिकतर सीटें जीत लेती है तो फिर राज्य में कांग्रेस सरकार की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है.

कुल 294 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास अब केवल 151 सदस्य रह गए हैं और उसे मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के सात सदस्यों का समर्थन प्राप्त है.

लेकिन कहा जा रहा है कि अगर जगन की पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो फिर कांग्रेस के कुछ और सदस्य भी जगन के साथ जा सकते हैं.

ऐसा हो या न हो, यह तो तय है कि इन उप चुनाव के परिणाम ही यह तय कर देंगे कि राज्य में अगले आम चुनाव में क्या होगा.

क्या आंध्र प्रदेश पहले की तरह कांग्रेस का किला बना रहेगा या फिर आंध्र प्रदेश में भी कांग्रेस का वही हाल होगा जो आज से कुछ दशक पहले तमिलनाडु में हुआ था.

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