ममता-मुलायम की गुगली पर कांग्रेस खामोश

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Image caption ममता और मुलायम ने यूपीए सरकार के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन

सिंह और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को राष्ट्रपति पद के लिए अपनी पसंद के रूप में पेश करके सबको चौंका दिया है.

उनके इस फैसले से अगले महीने 19 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में एक नया मोड़ आ गया है. इस बीच प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है.

ऐसा लगता है कि कांग्रेस ये फैसला नहीं कर पा रही है कि मुलायम और ममता की इस संयुक्त राजनीतिक गुगली का जवाब कैसे दिया जाए.

कांग्रेस के किसी भी नेता ने इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है.

कांग्रेस की इस खामोशी ने रहस्य और गहरा दिया है. भारतीय मीडिया में ऐसी खबरें भी चलने लगीं हैं कि कहीं इन सबके पीछे कांग्रेस के ही किसी गुट का तो हाथ नहीं है जो मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में अब नहीं देखना नहीं चाहते हैं.

इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री पी नारायणसामी ने बुधवार की देर रात वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के निवास स्थान पर मुलाकात की.

लगभग 15 मिनट तक वो प्रणब मुखर्जी के घर पर रहे लेकिन वहां मौजूद मीडिया से उन्होंने कुछ भी बात नहीं की.

दिलचस्प चुनाव

प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने एक निजी भारतीय टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा, ''कांग्रेस ने राष्ट्रपति के मुद्दे पर विपक्ष से कभी कोई बात नहीं की थी लेकिन बुधवार की घटना से साफ हो गया है कि कांग्रेस ने अपने सहयोगियों से भी कोई संपर्क नहीं किया था.''

शहनवाज हुसैन के अनुसार इस नए घटनाक्रम के कारण राष्ट्रपति का चुनाव दिलचस्प जरूर हो गया है.

यूपीए के एक अहम घटक दल डीएमके ने भी कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है.

डीएमके प्रमुख एम करूणानिधि ने कहा, ''प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम को राष्ट्रपति पद के लिए सुझाव दिए जाने पर मैं कुछ नहीं बोलूंगा. मैंने प्रणब मुखर्जी के नाम का सुझाव दिया था लेकिन अब पता नहीं कि ये सब कैसे हो गया.''

करूणानिधि के अनुसार मौजूदा गहमागहमी ख़त्म होने के बाद वो किसी नए नाम का सुझाव देंगे.

आम सहमति पर जोर

यूपीए के एक और सहयोगी एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि वो किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.

पवार ने कहा कि अब देखना ये है कि राष्ट्रपति पद के लिए आम सहमति बनाने के लिए कैसे रास्ता निकाला जाए.

जनता दल(यू) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि नए सिरे से सहमति बनाने की जरूरत है.

वामदलों की तरफ से मार्कस्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के सीतराम येचूरी ने कहा कि वाम दल चाहता है कि सर्वसम्मति से राष्ट्रपति का चुनाव हो.

येचूरी ने ये भी कहा कि यूपीए की तरफ से आधिकारिक तौर पर किसी का नाम पेश किए जाने के बाद ही सीपीएम इस बारे में अपनी राय देगी.

जबकि सीपीआई के गुरूदास दासगुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी को कांग्रेस का कोई भी उम्मीदवार स्वीकार नहीं होगा.

गौरतलब है कि बुधवार को सोनिया गांधी से मिलने के बाद ममता बनर्जी ने कहा था कि कांग्रेस ने प्रणब मुखर्जी और हामिद अंसारी के नाम का प्रस्ताव रखा है.

लेकिन मुलायम सिंह से मुलाकात के बाद ममता और मुलायम ने सोनिया गांधी के जरिए सुझाव गए दोनों नामों को खारिज करते हुए अपनी पसंद के तीन नाम की पेशकश कर दी.

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