क्यों अहम है आंध्र प्रदेश उपचुनाव के नतीजे ?

जगन मोहन रेड्डी (फाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption उपचुनाव के नतीजे जगन मोहन रेड्डी के लिए बहुत अहम हैं.

आंध्र प्रदेश में नेल्लोर लोक सभा और 18 विधान सभा सीटों के उपचुनाव में डाले गए वोटों की गिनती शुक्रवार को होगी जिसके लिए तमाम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

इन परिणामों से पहले राज्य में राजनैतिक तापमान और भी ज्यादा बढ़ गया है और लगभग सभी दलों के खेमों में असमंजस और तनाव का माहोल है.

उपचुनाव के नतीजों का बेचैनी से इंतज़ार किया जा रहा है क्योंके इससे न केवल राज्य की कांग्रेस सरकार और उसकी विरोधी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की किस्मत का फैसला होगा बल्कि यह भी इन्हीं उपचुनाव में तय होगा कि 2014 के अगले आम चुनाव में राज्य में हवा का रुख क्या होगा.

यह उपचुनाव सबसे ज्यादा कांग्रेस पार्टी के लिए अहम हैं.

इससे इस बात का फैसला होगा कि क्या अभी भी आंध्र प्रदेश कांग्रेस का एक सुरक्षित किला है.

2009 में आंध्र प्रदेश में उसे मिली 33 लोक सभा सीटों के कारण ही कांग्रेस केंद्र में अपनी एक गठबनधन सरकार बना सकी थी और अगर इस राज्य पर उस की पकड़ ढीली पड़ती है तो अगले चुनाव में कांग्रेस का जीतना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा.

आंध्र प्रदेश दक्षिण भारत का एक मात्र बड़ा राज्य है जहाँ कांग्रेस की सरकार है. लेकिन अगर इन उपचुनावों में वाईएसआर कांग्रेस अधिकतर सीटें जीत जाती है तो कांग्रेस की हालत और भी ख़राब हो जाएगी.

जगन का भविष्य

294 सीटों की विधान सभा में कांग्रेस के पास अब केवल 151 सदस्य रह गए हैं और उसे मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सात सदस्यों का समर्थन हासिल है.

लेकिन अगर वाईएसआर कांग्रेस अधिक्त सीटें जीत लेती है तो कांग्रेस के और भी कई सदस्य पार्टी छोड़ कर वाईएसआर कांग्रेस में जा सकते हैं.

राजनैतिक पंडित कह रहे हैं की अगर ऐसा हुआ तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की नौबत भी आ सकती है.

इस उपचुनाव के परिणाम वाईएसआर कांग्रेस और उसके अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी के लिए भी उतने ही अहम हैं.

जगन इस समय आय से ज्यादा संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं. अगर इन उपचुनावों में उनकी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं होता तो फिर उनके लिए मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी. जगन के बिना पार्टी का भविष्य अनिश्चित दिखाई दे रहा है.

Image caption मुख्यमंत्री किरण कुमार की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी हुई है.

इन उपचुनावों में अधिकतर सीटें जीत कर ही जगन अपनी पार्टी को मज़बूत बना सकते हैं और अगले चुनाव में उसे कांग्रेस के विकल्प के रूप में पेश कर सकते हैं.

वैसे जगन को इस बात से बड़ा सहारा मिला है कि कई एक्जिट पोल में बताया गया है कि उनकी पार्टी 12 से लेकर 16 विधान सभा सीटें और नेल्लोर लोक सभा सीट जीत सकती है.

तेलुगु देसम और चंद्रबाबू नायडू

इस समय आंध्र प्रदेश के तीन बड़े दलों में से सबसे बुरा हाल तेलुगु देसम का है.

अगर इन उपचुनावों में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है तो अगले चुनाव में सत्ता में लौटने का उनका सपना तो अधूरा रह जाएगा साथ ही मुख्य विपक्षी दल की जगह भी शायद उन्हें खाली करनी पड़ेगी.

इसलिए ये भी कहा जा रहा है की जगन को रोकने के लिए नायडू कांग्रेस पार्टी के साथ गुप्त सहयोग के लिए भी तैयार है.

वैसे उपचुनाव की 18 में से 17 सीटें आंध्र और रायल सीमा क्षेत्रों में हैं और एक मात्र सीट परकाल तेलंगाना में है और वहां तेलंगाना राज्य की मांग ही असल चुनावी मुद्दा था.

अगर ये सीट तेलंगाना राष्ट्र समिति जीत जाती है जैसा की आम तौर पर माना जा रहा है तो फिर अगले चुनाव में भी तेलंगाना की स्थिति बाक़ी दो क्षेत्रों से अलग रहेगी और वहां अलग राज्य की मांग ही छाई रहेगी.

ये भी हो सकता है कि तेलंगाना प्रान्त में अपनी हालत बेहतर बनाने के लिए सभी दल अलग राज्य की मांग का समर्थन शुरू करदें

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