बिहार में 18 दिन में 150 बच्चों की मौत

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Image caption बीते डेढ़ दशक से ये बीमारी हर साल इस क्षेत्र को अपना शिकार बना रही है

बिहार में मस्तिष्क ज्वर यानी इन्सेफलाइटिस जैसे लक्षणों वाली बीमारी से पिछले 18 दिनों में डेढ़ सौ बच्चों की मौत हो चुकी है.

राज्य के दस जिलों में ये रोग फैला है और इससे पीड़ित तीन सौ से ज्यादा लोग अस्पतालों में दाखिल बताए जाते हैं.

सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर, पटना और गया के अस्पतालों में हुई हैं क्योंकि मुख्य रूप से इन्हीं जिलों के अस्पतालों में ऐसे मरीजों का इलाज चल रहा है.

मुजफ्फरपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 29, केजरीवाल अस्पताल में 57, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 46 और गया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 11 बच्चों की मौत हुई है.

पंद्रह साल तक की उम्र के बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. लेकिन इस कारण मरने वालों में से अधिकांश की आयु एक से पांच वर्ष के बीच होती है.

16 साल से एक ही बीमारी

तेज बुखार, उलटी-दस्त, नीम बेहोशी और 'चमकी' यानी अंगों में रह-रह कर कंपन इस रोग के मुख्य लक्षण हैं.

इन लक्षणों के आधार पर डॉक्टर इसे इन्सेफलाइटिस जैसी बीमारी बताते हैं. हालांकि अब तक हुई नमूना-जांच या 'लैब टेस्ट' के बावजूद इस रोग के वायरस की ठीक-ठीक पहचान नहीं हो पाई है.

विशेषज्ञों ने फिलहाल सुविधा के लिए इसे ‘एक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम’ नाम दे दिया है. इसलिए बिल्कुल सटीक या खास दवा भी इस बीमारी के लिए नहीं बन पाई है.

पिछले 16 वर्षों से हर साल इसी मौसम में इस रोग का प्रकोप उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से लेकर बिहार के मुजफ्फरपुर तक सबसे अधिक देखा जा रहा है.

इस बार मुजफ्फरपुर के दोनों बड़े अस्पतालों में इसके मरीजों और मृतकों की तादाद पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है लेकिन गया में घटी है.

'हरकत में' आई सरकार

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बिहार सरकार ने इस रोग से मरने वाले हरेक बच्चे के निकटतम संबंधी को बतौर मुआवजा पचास हजार रुपये देने की घोषणा की है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है, “बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाने में देर होने से मृतकों की संख्या बढ़ी है. इसलिए प्रभावित जिलों के सरकारी डॉक्टरों को टीम बनाकर गांव-गांव में घूमने और मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जल्दी अस्पताल भेजने की हिदायत दी गई है. साथ ही बेहतर बचाव कार्य के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सहयोग मांगा गया है.”

इस बीच केंद्र से भेजे गए चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम मुजफ्फरपुर पहुंच चुकी है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने मुजफ्फरपुर जाकर हालत का जायजा लिया है.

उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को निराधार कहा है कि सौ बच्चों के मर जाने से मची त्राहिमाम के बाद राज्य सरकार की नींद खुली है.

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