आईआईटी की स्वायत्तता बनी रहेगी: पीएम

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Image caption आईआईटी कानपूर ने सबसे पहले कपिल सिब्बल के फैसले के खिलाफ़ आवाज़ उठाई थी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) को विश्वास दिलाया है कि उनकी स्वायत्तता के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी.

शुक्रवार को आईआईटी फैकल्टी फेडरेशन के प्रतिनिधियों के साथ एक मुलाक़ात में उन्होंने ये बातें कहीं.

ये प्रतिनिधि मंडल देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए कॉमन इंट्रेस प्रोग्राम (एकल दाख़िला प्रक्रिया) का विरोध कर रहा है और इसी सिसिले में उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा था.

ऑल इंडिया आईआईटी फैकल्टी फेडरेशन के अध्यक्ष संजीव सांघी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में कोई भी फैसला जल्दबाज़ी में नहीं किया जाना चाहिए.

इस मुलाक़ात के बारे में और अधिक जानकारी देते हुए फेडरेशन के सचिव एके मित्तल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बैठक के बाद कहा, ''हमने पीएम के समक्ष सिलसिलेवार ढंग से अपनी पूरी बात रखी. उन्होंने हमारी बात को ध्यान पूर्वक सुनने के बाद कहा, इस बारे में मानव संसाधन विकास मंत्री से बात करेंगे. आप लोग आश्वस्त रहे आईआईटी की स्वायत्तता बरक़रार रहेगी.''

फेडरेशन का मानना है कि एकल दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से आईआईटी और सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त तकनीकी संस्थानों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी.

प्रधानमंत्री और आईआईटी फैकल्टी के प्रतिनिधि मंडल के बीच बैठक की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल अपने अमेरिका दौरे में कटौती करके स्वदेश लौट रहे हैं.

मित्तल ने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक में हमने स्वात्तत का मामला उठाया और कहा, ''बेहतर होता कि आईआईटी काउंसिल देश के सभी प्रौद्योगिकी संस्थानों में एकल दाखिला परीक्षा पर फैसला लेने से पहले सभी आईआईटी सीनेट से बात कर लेती.''

मित्तल के अनुसार उनलोगों ने इस बात पर भी जोर दिया कि दाखिला परीक्षा में किसी भी तरह के फेरबदल 2013 से लागू किए जाएं.

बोर्ड के नंबरों को वरीयता देने का मामला उठाते हुए उन्होंने कहा, ''एकल दाख़िला परीक्षा के सरकारी फैसले के बाद कानपुर आईआईटी ने ख़ुद ही परीक्षा कराने का फैसला किया है. देश के अन्य सभी आईआईटी संस्थान इसका अनुसरण कर सकते हैं.''

मित्तल के मुताबिक़ फेडरेशन का मानना है कि नई सरकारी परीक्षा प्रक्रिया से छात्रों पर अतिरिक्त भार कम होने के बजाए बढ़ेगा.

उन्होंने कहा कि एक ही परीक्षा होने से उन्हें अतिरिक्त तनाव झेलना पड़ेगा.

मित्तल के अनुसार प्रधानमंत्री के सलाहकार टीकेए नायर के साथ भी बातचीत सकारात्मक और उत्साहवर्धक थी.

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