राष्ट्रपति चुनाव: एनडीए में अनिश्चितता बरकरार

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राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार उतारने को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की रविवार को अहम बैठक है.

राष्ट्रपति चुनाव का गणित

शनिवार को देश शाम तक भारतीय जनता पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक चलती रही लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका.

कांग्रेस ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करना है. अब एनडीए को ये तय करना है कि क्या उसे भी मैदान में उम्मीदवार उतारना है और अगर हाँ तो ये व्यक्ति कौन होगा. जनता दल यूनाइटेड ने भी कहा है कि रविवार की बैठक में ही अंतिम निर्णय होगा.

पीटीआई के मुताबिक भाजपा नेता राम जेठमालनी ने कहा है कि अगर भाजपा प्रणब मुखर्जी के नाम पर सहमत हुई तो वे राष्ट्रपति चुनाव के लिए खड़े होंगे.

ममता बर्नजी पहले ही कह चुकी हैं कि वो राष्ट्रपति पद के लिए एपजी अब्दुल कलाम के नाम का समर्थन करती हैं जबकि कलाम ने खुद अब तक इसके लिए हामी नहीं भरी है.

उधर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता पीए संगमा राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने पर अड़े हुए हैं. हालांकि उनकी पार्टी ने ऐसा करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का संकेत दिया है.संगमा को दो राज्यों तमिलनाडु और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों का समर्थन मिला हुआ है.

एनडीए का रुख

इस सब के बीच भारतीय जनता पार्टी की उलझन बढ़ गई है कि उम्मीदवार को लेकर उसका रुख क्या हो.

रविवार को एनडीए की बैठक से पहले भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की बैठक हुई जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी, गडकरी, सुषमा स्वराज और अनंत कुमार ने हिस्सा लिया था.

सबकी नजरें इसी पर लगी हैं कि आखिर एनडीए का राष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर क्या रुख होगा.

वर्तमान राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल 25 जुलाई 2012 को खत्म हो जाएगा.

राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचन मंडल या इलेक्टोरल कॉलेज करता है.इसमें संसद के दोनों सदनों तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं.

दो केंद्र शासित प्रदेशों, दिल्ली और पुद्दुचेरी, के विधायक भी चुनाव में हिस्सा लेते हैं जिनकी अपनी विधानसभाएँ हैं.

राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 5,49,442 वोट चाहिए यानी लगभग साढ़े पाँच लाख वोट. फिलहाल यूपीए के पास उसके सभी सांसदों और सभी विधायकों के वोटों को मिलाकर कुल वोट हैं – 4,60,191

एनडीए के पास सभी सांसदों और विधायकों को मिलाकर कुल 3,04,785 वोट हैं. जबकि ऐसी पार्टियाँ, जो ना तो यूपीए में हैं, ना ही एनडीए में, उनके वोट 2,60,000 से ज्यादा हैं.

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