प्रणब के खिलाफ अभी तक केवल अनिश्चितता

 सोमवार, 18 जून, 2012 को 12:31 IST तक के समाचार
प्रणब मुखर्जी

कांग्रेस के अलावा दूसरे गठबंधन उम्मीदवार पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाए हैं.

भारत में राष्ट्रपति चुनाव के लिए पर्चे दाखिल करने की तारीख के महज एक दिन पहले मैदान में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के अलावा कोई भी गंभीर प्रत्याशी नहीं दिख रहा है.

मुख्य विपक्षी खेमा, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के दलों की बैठकों के बावजूद कोई आम सहमति नहीं बन पाई है. एनडीए के मुख्य घटक दल भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी इस मामले में आम राय नहीं तैयार हो पाई है.

भाजपा में एक राय नहीं

भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार पार्टी के भीतर प्रणब मुखर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ाने पर ऊहापोह की हालत है.

इस नेता ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा, "पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक समूह चाहता है कि पार्टी प्रणब मुखर्जी को समर्थन दे. इस पक्ष का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में अंकगणित पूरी तरह से एनडीए के खिलाफ है इसलिए प्रणब मुखर्जी को समर्थन दे कर राजनीतिक शालीनता बनाए रखनी चाहिए."

जबकि पार्टी का दूसरा पक्ष चाहता है कि इस स्थिति के बावजूद एनडीए और भाजपा को प्रणब मुखर्जी के खिलाफ प्रत्याशी उतारना ही चाहिए. इस समूह का कहना है कि इससे मतदाता में संदेश जाएगा कि एनडीए और भाजपा सजग विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं और इसका सकारात्मक परिणाम अगले लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा.

अब सारा दारोमदार एनडीए की तरफ से लालकृष्ण आडवाणी पर है जिन्हें सभी घटक दलों के नेताओं से बात कर आम सहमति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग

एपीजे अब्दुल कलाम

एपीजे अब्दुल कलाम की चुप्पी नए कयासों को जन्म दे रही है.

प्रणब मुखर्जी के खिलाफ पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा अभी तक अकेले प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं. संगमा के ऊपर उनकी अपने पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की तरफ से दबाव है कि वो चुनाव से हट जाएं.

उनकी पार्टी ने लगातार ये संकेत दिए हैं कि संगमा अगर इस दौड़ से बाहर नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि संगमा अभी तक चुनाव लड़ने पर आमादा हैं और समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगे हैं.

संगमा को अभी तक केवल तमिलनाडु में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके और बीजू जनता दल का समर्थन ही हासिल है.

जानकारों का मानना है कि संगमा को जब तक एनडीए का समर्थन नहीं हासिल हो जाता तब तक उनके दावे को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता.

कलाम पर कयास

दूसरी तरफ, कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के घटक दल तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी अभी तक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर अड़ी हैं. तृणमूल कांग्रेस के अलावा अभी तक केवल शिव सेना ने कलाम को समर्थन की बात कही है.

हालांकि पहले समाजवादी पार्टी ने ममता बनर्जी के साथ मिलकर जिन नामों की घोषणा की थी उसमें कलाम का नाम शामिल था. लेकिन बाद में सपा नेता मुलायम सिंह यादव प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने की बात करने लगे.

राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर अकेली दिखाई दे रहीं ममता बनर्जी ने रविवार की रात तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को फोन कर एपीजे अब्दुल कलाम की उम्मीदवारी पर समर्थन मांगा लेकिन जयललिता ने उलटे पीए संगमा के लिए समर्थन की मांग कर दी.

इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने भी कलाम के नाम का समर्थन किया है.

लेकिन कलाम की चुप्पी ने अब तक केवल कयासों को जन्म दिया है.

राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए मंगलवार से नामांकन भरे जाने हैं. नाम वापस लेने की अंतिम तारीख चार जुलाई है. अगर जरूरी हुआ तो मतदान 19 जुलाई को होगा और 22 जुलाई को मतगणना पूरी हो जाएगी.

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