माओवादियों की मांद में माफिया राज

Image caption दंतेवाड़ा के बारे में कहा जाता है कि माओवादी की इजाजत के बगैर वहां कुछ नहीं हो सकता, लेकिन अवैध खनन हो रहा है. मतलब माओवादियों की मिलीभगत है

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की सड़कों पर सन्नाटा पसरना शुरू हो गया है. जंगलों और पहाड़ों के बीच से होकर गुजरने वाली सडकें वीरान होती चली जा रहीं हैं. मगर इस खामोशी को चीरते हुए कुछ वाहन अंधेरे में गाँव की तरफ जा रहे हैं.

वो कैसे वाहन हैं? इनमे से कुछ वाहन बड़े ट्रक हैं और इनके आगे-आगे छोटे वाहन में कुछ हथियारबंद लोग सवार हैं. दंतेवाड़ा की दहशत भरी वादियों में वो हथियारबंद लोग माओवादी नहीं हैं. उनके पास यहाँ के वीरानों में घूमने के लिए एक तरह का अघोषित लाइसेंस है.

कुछ ही देर में इन वाहनों में सवार लोग एक दूसरे से भीड़ जाते हैं. एक दूसरे पर संगीनें तन जाती हैं. यहाँ एक नए संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है. यह लौह अयस्क की तस्करी में शामिल गुटों के बीच वर्चस्व का संघर्ष है.

खनन एनएमडीसी के हाथ

दंतेवाड़ा की धरती लोहा उगलती है क्योंकि यहाँ लौह अयस्क का प्रचुर भण्डार हैं. वैसे यहाँ लौह अयस्क के खनन का ज़िम्मा सरकारी उपक्रम 'नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरशन' (एनएमडीसी) को दिया गया है. एनएमडीसी सीमित इलाके में ही खनन करती है जबकि वहां का पूरा इलाका लौह अयस्क से भरा हुआ है.

चूँकि यह इलाका गावों और जंगलों का है, यहाँ एनएमडीसी खनन नहीं कर रही है और यह पूरा खजाना हथियारबंद गुटों के हवाले हो गया है जो रात के अंधेरे में ट्रकों के माध्यम से इसे देश के दूसरे स्थानों पर बेच रहे हैं.

बच गए विधायक

पिछले महीने दंतेवाड़ा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक भीमा मंडावी नें तस्करी करके ले जा रहे लौह अयस्क के ट्रकों को पकड़ा तो उनपर संगीनें तान दी गई. इसको लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलके में काफी हलचल मच गयी है क्योंकि मांडवी सत्तारूढ़ दल के विधायक हैं.

मांडवी नें बीबीसी से बात करते हुए अपने उपर जानलेवा हमले की आशंका व्यक्त की है. उन्होंने कहा, "जिस पैमाने पर दंतेवाड़ा से लौह अयस्क की तस्करी हो रही है मेरे उपर किसी भी दिन जानलेवा हमला हो सकता है." मांडवी ने यही शिकायत सरकार से भी की है.

बैलाडीला की पहाड़ियों के नीचे बसा है कामेली गांव. कुछ दिनों पहले यहाँ के लोगों नें लौह अयस्क के तस्करों से लोहा लिया. अमूमन गाँव के लोग जल्द ही सो जाते हैं मगर उस दिन किसी काम से शहर गए गाँव के सरपंच सुरेश कुमार तमना को घर लौटने में देर हो गयी.

देर रात उन्होंने देखा कि उनके गॉव में ट्रक लगाकर कुछ लोग उसपर खेतों में पड़ा लौह अयस्क को ट्रक पर भर रहे हैं. तमना नें गाँव वालों के साथ मिलकर तस्करों को चुनौती दी और पुलिस को इसकी सूचना दी.

दंतेवाड़ा में एकमात्र होटल मधुबन के मालिक भानुप्रताप चौहान नें भी सार्वजनिक रूप से आशंका व्यक्त की है कि उनकी जान को भी लौह अयस्क के तस्करों से खतरा है.

अलग-अलग गुट

वहीं दंतेवाड़ा के रहने वाले भाजपा के प्रमुख नेता और राज्य पर्यटन मंडल के उपाध्यक्ष अजय तिवारी नें आरोप लगाया है कि कुछ स्थानीय अधिकारियों और पुलिस वालों नें तस्करी के अपने-अलग अलग गुट बना लिए हैं.

इस मामले पर नज़र रख रहे दंतेवाड़ा से प्रकाशित अखबार 'बस्तर इम्पैक्ट' के सम्पादक सुरेश महापात्र नें भी आशंका जताई कि अगर समय रहते लौह अयस्क की तस्करी पर रोक नहीं लगाई गयी तो जल्द ही दंतेवाड़ा की भूमि पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार के शूटरों जैसे संघर्ष का केंद्र बन जायेगी.

Image caption अवैध खनन इतना अधिक है कि सभी परेशान हैं

मेरे साथ बैलाडीला के पहाड़ों के तिलहट्टी के इलाके में मौजूद सुरेश महापात्र का कहना था, "यहाँ के इलाके में लोहे की फसल होती है खेतों में. इस इलाके में एनएमडीसी खनन नहीं करता. इसी का फायदा माफिया उठा रहा है. सरकार को चाहिए कि वह खुद इन खेतों से लौह अयस्क खरीदे जिससे यहाँ के ग्रामीणों को भी फायदा होगा और तस्करी भी रुकेगी."

लौह अयस्क की तस्करी में अब कई बड़े गुट शामिल हो गए हैं जो दंतेवाड़ा से माल भेजकर बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं. इस खेल में कुछ सरकारी अधिकारियों और पुलिसवालों के शामिल होने की बात भी अब उजागर हो चुकी है.

दंतेवाड़ा के बचेली में ही सातधन पुल के पास खनिज विभाग का नाका हुआ करता था. मगर लौह अयस्क के तस्कर वहां तैनात विभाग के कर्मचारियों को डराया धमकाया करते थे. नौबत यहाँ तक आ पहुंची कि विभाग के कर्मचारियों को नाका छोड़कर भाग जाना पड़ा. अब जिला प्रशासन नें भांसी थाने के सामने नया नाका बनाया है.

माओवादियों से साँठ-गाँठ

यह इलाका माओवादियों का गढ़ माना जाता है जहाँ कोई बिना उनकी मर्ज़ी से आ-जा नहीं सकता. यह वही इलाका है जहाँ माओवादियों नें कई हिंसक वारदातों को अंजाम दिया हैं. इस इलाके में सुरक्षा बल के जवान और अधिकारी असुरक्षित हैं तो ऐसे में आधी रात में इस इलाके से लौह अयस्क की तस्करी कई आशंकाओं को जन्म देती है.

कुछ लोगों का कहना है कि बिना माओवादियों के संरक्षण के इस इलाके में पत्ता भी नहीं हिल सकता. इसलिए बिना उनकी जानकारी के लौह अयस्क का बाहर जाना असंभव लगता है.

सरकारी दस्ते का गठन

दंतेवाड़ा के कलक्टर ओपी चौधरी का कहते हैं, "जिला प्रशासन ने लौह अयस्क के तस्करों पर शिकंजा कसने का काम शुरू कर दिया है."

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अनुमंडल अधिकारी के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों के एक दल का गठन किया गया है. इस दल में वन और खनिज विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है."

वह कहते हैं, "यह मामला गंभीर है क्योंकि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कई गुट लौह अयस्क की तस्करी में सक्रिय हैं, हमने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. हाल ही में हमने भांसी थाने के सामने एक नाका भी बनाया है और तस्करी को रोकने के लिए एक उड़न दस्ते का गठन भी किया है. जो भी गुट इस धंधे में शामिल हैं, उनपर करवाई शुरू कर दी गयी है."

हालांकि माओवादियों ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की है लेकिन कई ऐसे उदाहरण मिले हैं जब तस्करों नें माओवादियों का डर दिखाकर गांववालों या खनिज विभाग के लोगों को डराने का काम किया है.

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