राष्ट्रपति चुनाव: एनडीए की बैठक टली

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Image caption एनडीए के घटक दल एकराय पर पहुँच नहीं पा रहे हैं

ख़बरों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की बुधवार को होने वाली बैठक टल गई है.

इस बैठक में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय करने पर चर्चा होनी थी.

ख़बरों के मुताबिक एनडीए वामपंथी दलों की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी तय करने का इंतजार कर रही है.

पिछली बार 14 जून को भी हुई बैठक में एनडीए एक नाम पर सहमति जुटाने में विफल रही थी और इस बीच एक एक करके एडीए के घटक दल प्रणब को समर्थन देने की घोषणा कर रहे हैं.

कांग्रेस नेतृ्त्व वाला गठबंधन यूपीए राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब मुखर्जी का नाम घोषित कर चुका है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी कर चुके हैं कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए चुनाव होना चाहिए लेकिन पार्टी अभी तक कोई उम्मीदवार ही तय नहीं कर पाई है.

राष्ट्रपति पद के लिए 19 जुलाई को मतदान होना है.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आडवाणी और अन्य नेता राष्ट्रपति पद का चुनाव का इस्तेमाल ये दिखाने के लिए करना चाहते हैं कि विपक्ष एक मज़बूत भूमिका में हैं.

एनडीए के संयोजन शरद यादव ने इस मुद्दे पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, ''किसी राय पर आने समय लगता है, सभी से चर्चा की जा रही है. आडवाणी ने हमें कल बुलाया था, आपस में विचार-विमर्श चल रहा लेकिन कोई नतीजा नहीं आया है.''

मतभेद

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Image caption ख़बरें हैं कि भाजपा के भीतर भी कुछ लोग प्रणब मुखर्जी का समर्थन कर रहे हैं

हालांकि एनडीए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर दो भागों में बंटा नज़र आ रहा है. मंगलवार को एनडीए गठबंधन के सहयोगी दल शिवसेना ने खुलकर प्रणब मुखर्जी के नाम पर मोहर लगा दी थी.

वहीं बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार और शिरोमणि अकाली दल भी प्रणब मुखर्जी के ख़िलाफ़ उम्मीदवार खड़े करने को लेकर नाखुशी ज़ाहिर कर चुके हैं.

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दूल कलाम कह चुके हैं कि वे राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल नहीं है हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उनके नाम की पुरजोर वकालत की थी.

ऐसे में एनडीए को या तो एनसीपी के नेता पीए संगमा के नाम का समर्थन करना होगा या अपना उम्मीदवार घोषित करना होगा.

एनडीए में हालांकि कुछ पीए संगमा को समर्थन देने की बात कह रहे हैं लेकिन ताज़ा हालात में किसी भी उम्मीदवार पर एक राय बनाना मुशिकल लग रहा है.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक संगमा को समर्थन देने के लिए रज़ामंदी दिखा चुके हैं लेकिन एनसीपी की तरफ से संगमा का नाम वापस लिए जाने पर दबाव डाला जा रहा है.

बुधवार को पीए संगमा और एनसीपी के कुछ नेताओं की बैठक होने की संभावना है.

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