मुंबई: मंत्रालय भवन में भीषण आग की जांच के आदेश

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Image caption मंत्रालय में लगी आग में बहुत से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों के नष्ट होने की ख़बरें हैं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने महाराष्ट्र सरकार के सचिवालय मंत्रालय भवन में दोपहर बाद भीषण आग के कारणों की जांच के आदेश दिए हैं.

मुंबई पुलिस की क्राईम ब्रांच को इस जांच का जिम्मा सौंपा गया है.

इस हादसे में तीन लोगों की मौत हुई है जबकि 10 घायल हुए हैं. मृतकों में दो के नाम महेश गोगले और उमेश कोटेकर बताए गए हैं.

दक्षिण मुंबई में महाराष्ट्र सरकार के सचिवालय मंत्रालय भवन में गुरुवार को दोपहर बाद भीषण आग लग गई जो कई घंटों बाद भी बुझाई नहीं जा सकी थी.

इससे सात मंज़िली इमारत की तीन मंज़िलें बुरी तरह प्रभावित हुई और मुख्यमंत्री के कार्यालय सहित कई कार्यालयों को नुक़सान पहुँचा है.

आग लगने के बाद बहुत से लोग इमारत के विभिन्न हिस्सों में फँसे रहे. टेलीविज़न पर दिखाई जा रही तस्वीरों में लोग खिड़कियों से बाहर बाल्कनियों में और एसी के लिए लगे स्टैंड तक में खड़े दिखे.

तस्वीरों में: मंत्रालय भवन की आग

लोगों को बचाने के लिए अग्निशमन विभाग के क्रेनों और हेलिकॉप्टर तक की मदद लेनी पड़ी.

कम से कम 11 लोग घायल हुए हैं. इनमे से कुछ की हालत गंभीर है.

इमारत और कार्यालयों में हुई क्षति का अनुमान अभी नहीं लगाया जा सका है और न ये पता चला है कि आग कैसे और क्यों लगी.

सरकार ने इसकी जाँच के आदेश दिए हैं.

बचाव कार्य

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Image caption मंत्रालयों में कई अहम दस्तावेज़ों के नष्ट होने की आशंका जताई गई है

इस भवन में आम दिनों में छह हज़ार से भी अधिक कर्मचारी काम करते हैं और यहाँ बड़ी संख्या में बाहरी लोग आते हैं.

भवन की चौथी मंज़िल में दोपहर पौने तीन बजे आदिवासी कल्याण विभाग के मंत्री बबनराव पचपुते के कार्यालय से आग शुरु हुई और देखते ही देखते ऊपर के तीनों मंजिलों में फैल गई.

आग की वजह से भवन के भीतर फँसे लोगों को निकालने के लिए मुंबई पुलिस की फ़ोर्स वन और क्विक रेस्पॉन्स टीमों को बुलवाया गया था.

अग्निशमन विभाग के कर्मचारी भी बड़ी संख्या में राहत और बचाव कार्य में लगे रहे.

राहत और पुनर्वास विभाग के सचिव प्रवीण परदेशी के अनुसार इमारत की पाँचवीं और छठवीं मंज़िल में फँसे 65 लोगों को अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने बाहर निकाला.

उनका कहना है कि आग लगने के बाद तीन हज़ार से अधिक कर्मचारियों और इतने ही बाहरी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारतीय नौसेना के दो हेलिकॉप्टरों को भी मदद के लिए बुलाया गया था लेकिन छत पर किसी के न होने की वजह से उनकी आवश्यकता नहीं पड़ी.

इस भवन की चौथी मंज़िल पर शहरी विकास मंत्रालय का कार्यालय है. आग लगने के बाद से मीडिया में ये कयास लगाए जाते रहे कि आदर्श घोटाले से जुड़े दस्तावेज़ों सहित कई दस्तावेज शायद नष्ट हो गए हैं. हालांकि अभी अधिकृत रूप से अभी कुछ नहीं कहा गया है.

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के कार्यालयों को बहुत नुक़सान पहुँचा है.

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