सिंगूर की जमीन किसानों को वापस मिलेगी: ममता

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Image caption ममता बनर्जी ने सिंगूर में टाटा के संयंत्र के खिलाफ किसानों के आंदोलन का नेतृत्व किया था

पश्चिम बंगाल सरकार के सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास अधिनियम को कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से असंवैधानिक करार देने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोहराया है कि सरकार किसानों की जमीनें उन्हें लौटाने को प्रतिबद्ध है.

ममता बनर्जी ने कोलकाता में पत्रकारों से कहा, "सिंगूर के जो किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते उन्हें उनकी जमीन वापस मिल जाएगी. सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है."

ये जमीन टाटा कंपनी को नैनो कार बनाने के लिए तत्कालीन वामपंथी सरकार की ओर से ही लीज पर दी गई थी. लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व में कुछ किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद टाटा ने नैनो कार के लिए संयंत्र को गुजरात ले जाने का फ़ैसला किया था.

इसके बाद सत्ता में आई ममता बनर्जी सरकार ने पिछले वर्ष जून में एक अधिनियम के जरिए सिंगूर में टाटा के साथ हुए समझौते को रद्द करते हुए ज़मीन किसानों को वापस देने का प्रावधान किया था.

लेकिन शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इस अधिनियम को यह कहकर खारिज कर दिया कि इस अधिनियम के लिए राष्ट्रपति से अनुमति नहीं ली गई थी.

'किसानों के साथ हैं'

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "हम किसानों के साथ हैं और आगे भी उनके साथ रहेंगे. आखिर में उनकी जीत होगी."

ममता बनर्जी ने हालांकि हाईकोर्ट के फ़ैसले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

टाटा ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के ही एक सदस्यीय बेंच के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने पिछले वर्ष इस अधिनियम को सही ठहराया था.

कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ममता सरकार दो महीने के अंदर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और सीपीएम के नेता सूर्याकांत मिश्रा ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे उनकी पार्टी की बात सही साबित हुई है.

उनका कहना था, "हम कहते रहे हैं कि ये अधिनियम असंवैधानिक है और हमने सरकार को कई सुझाव भी दिए थे कि इस मामले से किस तरह से निपटा जाना चाहिए."

फिलहाल सिंगूर की जमीन टाटा के पास ही है और कंपनी ने इसे वापस लौटाने से इनकार कर दिया है.

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