मुंबई की पार्टियों में धोबले का धावा

 गुरुवार, 28 जून, 2012 को 15:54 IST तक के समाचार

गत सप्ताहांत मुंबई में सैकड़ों लोगों ने हाल के समय में बारों और क्लबों पर पड़े पुलिस के कई छापों का विरोध करने के लिए प्रदर्शन किया. कई लोग इन छापों को अधिकारियों की ओर से भारत के सबसे अधिक कॉस्मोपोलिटन शहर में लोगों के नाचने-गाने और शराब पीने पर रोक लगाने की कोशिशें बताते हैं.

मॉनसून की बारिश के थमने के बाद, मुंबई के समुद्रतट पर एक तड़क-भड़क वाले इलाक़े में कुछ लोग जुटे हैं.

वे गा रहे हैं,"वी वांट टू बी फ़्री, फ़्री. वी वांट टू बी फ़्री मुंबई."

कई लोगों ने काले कपड़े पहने हुए हैं, शहर में नाइटलाइफ़ की मौत का मातम मनाने के लिए.

कुछ के हाथों में हॉकी स्टिक हैं, जिनपर लिखा है – धोबले वापस जाओ – हॉकी पर लिखा ये संदेश पुलिस कमिश्नर वसंत धोबले के बारे में है, जो हॉकी स्टिक लेकर छापे मारने के लिए जाने जाते हैं.

दोस्तों के साथ शराब या व्हिस्की का आनंद लेना पसंद करनेवाली 29 वर्षीया एलिटा सिक्वेरिया कहती हैं,"हम कड़ी मेहनत करते हैं, हम मज़ा भी करना चाहते हैं, इसमें कोई बुरी बात नहीं. हसे बाहर जाने और मस्ती करने की आज़ादी छीनी जा रही है.”

विरोध में हिस्सा ले रहे एक डीजे, आदित्य कहते हैं,"वे हमें मस्ती नहीं करने देना चाहते. हम संगीत चलाते हैं, मगर सबकुछ जल्दी बंद होने के कारण हमें अपने कई शो रद्द करने पड़े हैं."

धोबले

"धोबले वीडियो कैमरा लेकर आए और बिना कुछ कहे सीधे वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे, बिना पहले ये बताए कि मेरे क्लब में ज़रूरत से अधिक लोग हैं"

एक बार मालिक

मुंबई भारत की वित्तीय और मनोरंजन राजधानी है और ये लंबे समय से देश का एक प्रगतिशील शहर रहा है जहाँ उदार मूल्यों और जीवनशैली को मान्यता मिलती रही है.

शहर में हर रात, दर्जनों पार्टियाँ होती हैं, कभी छतों पर, तो कभी नाइटक्लबों में, कभी पब में, तो कभी स्विमिंग पूलों पर.

मगर हाल के हफ़्तों में, शहर में पुलिस ने कई बारों और क्लबों पर छापे मारे हैं और कभी ज़रूरत से ज़्यादा लोगों के वहाँ होने को लेकर, तो कभी लाइसेंसों में कमियाँ निकालकर या तो उनको बंद कर दिया है या फिर उनपर जुर्माने लगाए हैं.

पुलिस का कहना है कि वे केवल कानून का पालन कर रहे हैं, मगर उनके आलोचक कहते हैं कि ये नियम बेहद पुराने हैं, कई 1950 और 1960 के दशक के और वे आधुनिक भारत से मेल नहीं खाते.

इन छापों के विरूद्ध इंटरनेट पर हुए विरोध में अभी तक 30,000 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं और लोगों के ग़ुस्से का निशाना धोबले हैं.

नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर पर एक नाइटक्लब के मालिक ने कहा,"धोबले वीडियो कैमरा लेकर आए और बिना कुछ कहे सीधे वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे, बिना पहले ये बताए कि मेरे क्लब में ज़रूरत से अधिक लोग हैं.”

उसने कहा, उन्होंने हमसे कहा कि हमारे 2000 वर्ग फ़ीट के क्लब में 10 जोड़े आ सकते हैं, उन्होंने हमसे गाने की आवाज़ कम करने के लिए कहा, और ये इस बात के बावजूद कि हमारे पास डिस्को चलाने का लाइसेंस था.

कई अन्य बार मालिकों ने बीबीसी से कहा कि धोबले उनके यहाँ भी आए थे और उनसे भी जुर्माना लिया गया.

पुराने क़ानून

भारत में मदिरापान

  • भारत के कई शहरों में मदिरापान को मान्यता, मगर अभी भी जटिलताएँ क़ायम
  • शराब पीने के बारों में मुख्यतः पुरूषों को ही प्रवेश, शहरों में सीमित
  • गुजरात, मणिपुर, नागालैंड, मिज़ोरम में शराब पर पाबंदी
  • मुंबई समेत कई शहरों में ड्राई डे (शराब पर पाबंदी)
  • शराब के सीधे प्रचार पर रोक

1952 के बॉम्बे पुलिस एक्ट के अनुसार 1000 वर्ग फ़ीट के क्षेत्र में 166 से अधिक लोगों के जमा होने पर जुर्माना लगाया जा सकता है मगर बार और क्लब मालिकों का कहना है कि बिना कानून तोड़े भी उनसे जुर्माना लिया जा रहा है.

इन बारों को केवल खोलने के लिए, मालिकों को अलग-अलग तरह के तीन दर्जन परमिट लेने होते हैं जिनमें शराब के लाइसेंसे, नाच के लाइसेंस, संगीत के लाइसेंस, सार्वजनिक प्रदर्शन के लाइसेंस जैसी चीज़ें शामिल हैं और बार मालिकों का कहना है कि ये बेहद जटिल, समय बर्बाद करनेवाली और महँगी व्यवस्थाएँ हैं.

मुंबई में 25 साल से अधिक की उम्र के लोग शराब पी सकते हैं, मगर 1952 के क़ानून के अनुसार घर या बार में शराब पीने के लिए लोगों के पास काग़ज़ी परमिट होना ज़रूरी है और इस क़ानून का लगातार उल्लंघन होता है.

शहर में पार्टियाँ आदि आयोजित करवानेवाले एक म्यूज़िक प्रोमोटर समीर मल्होत्रा कहते हैं,”मुंबई में इस समय एक अजीब सा डर है, लोग बाहर जाने से डर रहे हैं, यहाँ तक कि किसी के घर में होनेवाली पार्टी में जाने से भी.“

उन्हें लगता है कि पुलिस शहर के एक ख़ास वर्ग को निशाना बना रही है, ऐसे युवा वर्ग को जो अमीर हो रहा है और पुलिस उन्हें परेशान कर एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाह रही है.

"मुंबई में इस समय एक अजीब सा डर है, लोग बाहर जाने से डर रहे हैं, यहाँ तक कि किसी के घर में होनेवाली पार्टी में जाने से भी"

समीर मल्होत्रा, संगीत आयोजक

ये कहते हुए कि इन क़ानूनों से विदेशी नागरिक और व्यवसाय मुंबई से दूर हो रहे हैं, समीर कहते हैं,”दुनिया में हर जगह 24 घंटे पार्टियों की जगहें होती हैं, मगर हम यदि चाहते हैं कि दुनिया हमारे देश में आए तो हमें अपनी सुविधाएँ बेहतर करनी होंगी. “

वैसे केवल युवा ही इन छापों से परेशान नहीं हैं.

पिछले सप्ताह, 55 वर्षीया प्रीति चांदरियानी के घर पर भी पुलिस ने बिना परमिट के शराबयुक्त चॉकलेट रखने और बनाने के लिए छापा मारा.

एक मामले में शहर के एक करी हाउस पर छापा मारकर कई महिलाओं को ये कहते हुए गिरफ़्तार किया गया कि वे वेश्याएँ हैं. 11 में से नौ महिलाएँ रिहा की जा चुकी हैं और उनका कहना है कि वे बस एक बर्थडे पार्टी में गई थीं.

मगर पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहराती है. पिछले दिनों एक पार्टी पर पड़े छापे की ख़बर मीडिया में काफ़ी उछली जिसमें कई जानी-मानी हस्तियाँ और खिलाड़ी आए थे. पुलिस का कहना है कि वहाँ 100 लोगों की जाँच से पता चला है कि 44 लोगों ने नशीले पदार्थों का सेवन किया हुआ था.

ड्यूटी

तमाम आलोचनाओं के बावजूद धोबले कहते हैं कि वे बस अपना फ़र्ज़ निभा रहे हैं.

उन्होंने एक भारतीय टीवी चैनल से कहा,”हम छापे नहीं मार रहे, हम बस ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि क़ानून का पालन हो. हम नाइटलाइफ़ पर रोक नहीं लगा रहे, लोगों को मस्ती करनी ही चाहिए.“

बीबीसी ने वसंत धोबले से संपर्क किया तो उन्होने इन छापों के बारे में कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया और कहा कि वे बस एक साधारण पुलिसकर्मी हैं.

"हम आपको ये आश्वासन देते हैं कि निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होगी.मगर हम मुंबई पर इस बात का कलंक भी नहीं लगने देना चाहते कि यहाँ नशीले पदार्थों का सेवन करनेवाली पार्टियाँ होती हैं."

सतेज पाटिल, गृहमंत्री, महाराष्ट्र

कई और लोग उनकी कार्रवाई का समर्थन भी कर रहे हैं और कहते हैं कि वे भारती संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं.

फ़ेसबुक पर उनके समर्थन में शुरू किए गए एक ग्रुप में एक पोस्ट पर लिखा है,”वो ईमानदार हैं. आज के युवा केवल लड़के-लड़कियों के साथ मस्ती करना चाहते हैं“

एक अन्य ने लिखा है,”हम मुंबई के संपन्न तबके की इस बेछूट नाइटलाइफ़ पर लगाम लगाने की उनकी कार्रवाई का पूरा समर्थन करते हैं. “

धोबले को शहर के पुलिस प्रमुख अरूप पटनायक और महाराष्ट्र सरकार का भी समर्थन प्राप्त है जिन्होंने उन क़ानूनों की समीक्षा का वादा किया है जिनपर धोबले कार्रवाई कर रहे हैं.

प्रदेश के गृहमंत्री सतेज पाटिल ने बीबीसी से कहा,”हम आपको ये आश्वासन देते हैं कि निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होगी.

"मुंबई एक अंतरराष्ट्रीय पहचान वाला शहर है और इसलिए इसके 24 घंटे जागे रहनेवाले शहर की छवि को बनाए रखने पर ध्यान दिया जाएगा.

"मगर हम मुंबई पर इस बात का कलंक भी नहीं लगने देना चाहते कि यहाँ नशीले पदार्थों का सेवन करनेवाली पार्टियाँ होती हैं. ऐसी अवैध गतिविधियों के विरूद्ध क़ानूनन कार्रवाई होगी."

मगर इस घटना को भारत में पुराने और नए का संघर्ष बतानेवाले पार्टी जानेवाले लोगों का कहना है कि वो दशकों पुराने क़ानूनों को बदलवाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.

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