एथलीट पिंकी को नहीं मिली जमानत

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Image caption पिंकी प्रमाणिक को दो सरकारी अस्पतालों में लिंग जाँच के लिए भेजा गया मगर वहाँ जाँच नहीं हो पाई

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24-परगना जिले की एक अदालत ने शुक्रवार को एथलीट पिंकी प्रामाणिक की जमानत की याचिका को खारिज करते हुए उसे दोबारा 12 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

महिला एथलीट पिंकी को अपने साथ रहने वाली एक तलाकशुदा महिला के साथ बलात्कार और शारीरिक अत्याचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

अदालत ने पिंकी के लिंग निर्धारण के लिए उसका क्रोमोसोम परीक्षण कराने की अपील भी मंजूर कर ली.

दो-दो बार परीक्षण के बावजूद अब तक यह तय नहीं हो सका है कि पिंकी पुरुष है या महिला.

बारासात की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनीता माथुर की अदालत ने पिंकी की जमानत की अर्जी को ठुकराते हुए उसकी न्यायिक हिरासत की अवधि 12 जुलाई तक बढ़ा दी.

पिछले 14 जून को गिरफ्तारी के बाद पिंकी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.

हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद शुक्रवार को अदालत में उसकी पेशी थी.

अपर्याप्त सुविधा

इस दौरान दो सरकारी अस्पतालों में पिंकी के लिंग निर्धारण के लिए उसकी जाँच की गई थी लेकिन ऐसी जांच की सुविधा नहीं होने की वजह से इसके लिए गठित मेडिकल बोर्ड ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे.

उसके क्रोमोसोम की जांच कहीं और कराने की सिफारिश की गई थी.

पिंकी के वकील तुहिन राय कहते हैं,"लिंग निर्धारण के नाम पर पिंकी को एक से दूसरे अस्पताल में ले जाया जा रहा है. इससे उसे भारी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है."

बार-बार जांच के लिए जाने पर होने वाली मानसिक और शारीरिक परेशानी को ध्यान में रखते हुए बचाव पक्ष ने अदालत से किसी ऐसे अस्पताल में जांच का निर्देश देने का अनुरोध किया है जहां जांच की मुकम्मल सुविधा हो.

इससे इस बात की पुष्टि हो जाएगी कि पिंकी पुरुष है या महिला.

ध्यान रहे कि 11 डाक्टरों को लेकर बने एक मेडिकल बोर्ड की देख-रेख में 25 जून को महानगर के सबसे बड़े एसएसकेएम अस्पताल में पिंकी की जांच हुई ती.

लेकिन वहां सुविधा नहीं होने की वजह से उसका क्रोमोसोम परीक्षण नहीं हो सका था.

इससे पहले 19 जून को बारासात के सरकारी अस्पताल में भी उसकी जांच हुई ती.

लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा था. उसके बाद उसे एसएसकेएम में भेजने की सिफारिश की गई थी.

तनाव

पिंकी और उसके घरवाले शुरू से ही बलात्कार के आरोपों का खंडन करते हुए इसे एक साजिश करार दे रहे हैं.

उनका कहना है कि जांच की सुविधा नहीं होने की वजह से पिंकी को भारी मानसिक तनाव के दौर से गुजरना पड़ रहा है.

जांच की रिपोर्ट आते ही दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.

पिंकी की बहन झुम्पा कहती है, "हमें पिंकी के महिला होने पर कोई शक नहीं है. जांच से सब साफ हो जाएगा. लेकिन जांच की आड़ में पहले ही उसके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है."

वह कहती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली किसी एथलीट के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है.

आरोप साबित होने से पहले ही उसको सबकी नजरों में दोषी बना दिया गया है.

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