धमाकों ने उजाड़ा, मानवता ने बसाया

 शनिवार, 30 जून, 2012 को 14:57 IST तक के समाचार

कोई चार साल पहले धमाकों में परिवार के मुखिया की मौत के बाद उस घर परिवार में ये उत्सव का मौका आया तो अपनों के साथ समाज के बहुतेरे लोग साथ खड़े नज़र आये.

जयपुर में वर्ष 2008 में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने 60 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी. उनमें ताराचंद शर्मा भी थे.

शुक्रवार की रात ताराचंद की पुत्री शिवानी की शादी हुई, तो आशीर्वाद देने कई गणमान्य लोग पहुँचे जिनमें फिल्म अभिनेता संजय दत्त भी थे.

विवाह के मंगल गीत और शहनाई की धुन ने फिजां में उत्सव का भाव भरा तो धमाकों का संताप झेल चुके इस परिवार में खुशियां लौट आई.

ताराचंद तो इस दुनिया में नहीं है, लेकिन शिवानी की शादी के लिए समाज खुद खड़ा हो गया. पंजाबी महासभा ने अपने हाथों से इस शादी का इंतजाम किया और अपने जज्बे से माहौल की मांगलिकता को और भी गहरा कर दिया.

पंजाबी महासभा के रवि नैयर इस विवाह में ऐसे मशगूल थे जैसे उनकी अपनी बिटिया परिणय सूत्र में बंध रही हो.

संजय दत्त की मौजूदगी

"पंजाबी महासभा ने इस बाबत बताया तो चला आया, पंजाबी दिल के बड़े अच्छे होते है. मैं अपने स्व. पिता के अधूरे काम पूरे करना चाहता हूँ"

संजय दत्त

एक-एक अतिथि की मेहमान-नवाजी में लगे नैयर बताने लगे कि धमाको के बाद उन्हें मीडिया से पता लगा कि ताराचंद के परिवार के सामने तीन बेटियों के विवाह का संकट खड़ा हो गया है.

वे कहते हैं, ''उस दुःख और विषाद की घड़ी में जब हम शोकाकुल परिवार में पहुंचे तो बरबस मुंह से ये ही निकला, आप चिंता न करें बेटियों की शादी धूमधाम से होगी, ना जाने कैसे शक्ति और साधन मिले, एक-एक कर तीनों बेटियों की शादी हो गई.''

कभी फिल्म अभिनेता मरहूम सुनील दत्त जयपुर से ही सदभावना के सिपाही बन कर निकले थे. लेकिन अब उनके बेटे संजय दत्त शुक्रवार को एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में जयपुर में थे.

मौका मिला तो शिवानी को आशीर्वाद देने चले आए. कहने लगे कि वो शिवानी और जितेंद्र को आशीर्वाद देने आए हैं.

'दिल के बड़े अच्छे पंजाबी'

संजय दत्त कहते हैं, ''पंजाबी महासभा ने इस बाबत बताया तो चला आया, पंजाबी दिल के बड़े अच्छे होते है. मैं अपने पिता के अधूरे काम पूरे करना चाहता हूँ.''

अपने विवाह से शिवानी अभिभूत थीं. लेकिन पूछा तो दुल्हन बनी शिवानी कुछ बोल नहीं पाई. अलबता दुल्हे राजा जितेंद्र ने कहा कि वे समाज के इस जज्बे से बहुत खुश हैं.

दरअसल शिवानी उसी घर में दुल्हन बन कर गई हैं जहाँ दो बहने इन धमाकों के बाद बहू बन कर गई थी.

शिवानी के बहनोई विनोद कहते है, ''समाज ने ये बहुत नेक काम किया है. हमारे घर में ताराचंद जी के परिवार से ये तीसरी बहू होगी.''

इस उत्सव में सामाजिक शिरकत का दायरा बड़ा था तो सवाल भी बड़ा था. हर कोई इस फर्क को रेखांकित कर रहा था कि एक वो हाथ थे जो धमाकों में इंसानियत को लहूलुहान कर गए, एक ये हाथ है जो मानवता के मंगल के लिए बढ़े और आशीर्वाद के लिए उठे.

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