असम में अब बीमारियों का ख़तरा

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असम में 27 ज़िलों में आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 35 हो गई है, जबकि करीब 11 लाख लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं.

बताया जा रहा है कि ये बाढ़ सन 2004 में आई बाढ़ से भी ज़्यादा खतरनाक है, जिसमें 43,000 हेक्टेयर से ज़्यादा की ज़मीन पर खड़ी फसल बर्बाद हो गई है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सोमवार को राज्य का दौरा कर सकते हैं.

उम्मीद जताई जा रही है कि वे बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत कोष की घोषणा करेंगें.

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया फोर्स के वरिष्ठ सदस्य के एन सिंह और राज्य के कृषि मंत्री नीलमणि सेन देका ने भी शनिवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया.

बीमारियों का डर

हालांकि आज बाढ़ की स्थिति में थोड़ा सुधार देखने को मिला है क्योंकि बारिश न होने की वजह से जलस्तर नीचे गिरा है.

बाढ़ पीड़ितों के लिए करीब 173 राहत कैंप लगाए गए हैं, लेकिन जलस्तर गिरने के बाद कुछ लोग अपने घरों की ओर लौट रहे हैं.

लेकिन अधिकारियों ने चिंता जताई है कि जलस्तर नीचे गिरते ही कई तरह की बीमारियां फैलने का डर है.

उधर जानवर भी बाढ़ के कहर से अछूते नहीं रहे हैं. काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में कई हिरणों की मौत हो गई है, जबकि बाकी जानवर ऊंची भूमिक्षेत्र का रुख कर रहे हैं.

असम के मुख्यमंत्री इस समय अमरीका में हैं, लेकिन उन्होंने ज़िलाधिकारियों को कहा है कि बाढ़ पीड़ितों की राहत से जुड़ा हर फैसला वे ले सकते हैं.

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