असम: बाढ़ में फंसे है लाखों लोग, अब तक 95 लोगों की मौत

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Image caption इस बाढ़ की वजह से बीस लाख लोग प्रभावित हुए हैं और कम से कम 95 लोग मारे गए है.

भारत के पूर्वोत्तर में सबसे बड़े राज्य असम में बाढ़ की वजह से हालात पेचीदा बने हुए हैं. यूँ तो पिछले कुछ समय से बारिश के रुकने की वजह से ब्रह्मपुत्र के उफान में कमी आई है, लेकिन लाखों लोग अभी भी नारकीय परिस्थितियों में फंसे हुए हैं.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार इस बाढ़ की वजह से बीस लाख लोग प्रभावित हुए हैं और कम से कम 95 लोग मारे जा चुके हैं.

बाढ़ प्रभावित 20 लाख लोगों में से क़रीब पांच लाख ही सरकार द्वारा स्थापित बाढ़ राहत शिविरों तक पहुँच पाए हैं. ज़्यादातर लोग ऊँचीं जगहों और नदी के किनारे के तटबंधों पर फंसे हुए हैं.

एक स्थानीय कार्यकर्ता जो राज्य के सोनितपुर ज़िले में बाढ़ पीड़ितों के बीच काम कर रहे हैं, उन्होंने बीबीसी को फोन पर बताया, "यहाँ तीन दिन से बारिश रुकी होने के कारण पानी के स्तर का ऊपर बढ़ना रुक गया है."

उनके अनुसार अधिकतर लोग अभी भी कैम्पों में बने हुए हैं क्योंकि 70 के ऊपर गावों में अभी तक पानी भरा हुआ है.

राहत सामग्री को लेकर भी चारों तरफ़ से शिकायतें आ रही हैं. अधिकतर सरकारी मदद राहत शिविरों तक ही सीमित हैं तथा जो लोग दूर दराज़ इलाकों में फंसे हुए हैं उन तक अभी भी कोई राहत नहीं पहुँची हैं.

राहत सामग्रियों की गुणवत्ता

कई जगहों पर जो राहत सामग्री बांटी जा रही है उसे खराब गुणवत्ता का बताया जा रहा है.

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Image caption सरकारी मदद राहत शिविरों तक ही सीमित हैं तथा जो लोग दूर दराज़ इलाकों में फंसे हुए हैं उन तक अभी भी कोई राहत नहीं पहुँची हैं.

असम के नलबाड़ी और कामरूप जिलों में अपनी एक स्वयंसेवी संस्था के ज़रिये काम करने वाले प्रीतिभूशन डेका ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "लोगों को दाल और चावल मिला है. एक दिन के लिए एक आदमी को महज़ 600 ग्राम चावल ही दिया गया है. नलबाड़ी ज़िले में दाल की खरब गुणवत्ता के कारण पीड़ित गावं वालों ने राहत सामग्री लौटा दी है."

अंतर्राष्ट्रीय सहायता संस्था एक्शन एड के स्थानीय अधिकारी मृणाल गोहेन का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती हैं क्योंकि बहुत सारे लोग अभी भी लापता हैं.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को असम के बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा करने के बाद 500 करोड़ रुपयों की सहायता की घोषणा की थी.

यूँ तो असम में हर साल बाढ़ आती हैं लेकिन इस वर्ष बाढ़ ने बहुत ही विकराल रूप ले लिया है.

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